
सब्जी व अचार आदि में प्रयोग होने वाली कलौंजी न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती है बल्कि इसे अस्थमा के इलाज के लिए औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। शोध बताते हैं कि कलौंजी में थाइमोक्वीनोन नामक तत्त्व पाया जाता है जो इस बीमारी से लड़ने में कारगर है। इसका नियमित प्रयोग अस्थमा के मरीजों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।
इस्तेमाल का तरीका :
कलौंजी को पीसकर पाउडर बना लें। 2-5 ग्राम (आधे-एक चम्मच) सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं।
कलौंजी का तेल भी बाजार में उपलब्ध है। एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच तेल डालकर एक चम्मच शहद मिला लें। इसे सुबह खाने व रात में सोने से पहले लेना इस रोग के मरीजों के लिए फायदेमंद है।
कलौंजी के दानों को रोजमर्रा में दाल-सब्जियों आदि में डालकर प्रयोग करना भी अच्छा रहता है।
कुछ दानों या तेल को पानी में उबालकर भाप लेने से भी राहत मिलती है। ऐसा करते समय सिर को तौलिए से ढंकें व आंखें बंद करके लंबी सांस लें जिससे भाप फेफड़ों तक पहुंच सके।
इसके तेल को गुनगुना करके 1-2 बूंद नाक के ऊपर डालकर मालिश करना भी असरकारी है।