
शरीर के लिए खनिज तत्त्व (मिनरल्स) अनिवार्य हैं। ये ऐसे तत्त्व होते हैं जिनका निर्माण शरीर स्वयं नहीं करता, इसकी पूर्ति हमें बाहरी स्रोतों से करनी पड़ती है।
इसलिए होती है जरूरत
हड्डियों के लिए कैल्शियम, त्वचा को जिंक, आंतों को कॉपर, फेफड़ों के लिए आयोडीन, हृदय को मैगनीशियम व अन्य अंगों को सेहतमंद रखने के लिए पोटेशियम, बोरोन, कोबाल्ट आदि खनिज पदार्थों की जरूरत होती है। इनकी कमी से थकान, आलस, चिड़चिड़ापन और पैरों में दर्द जैसे लक्षण होते हैं। जो आगे चलकर मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा, कैंसर, जोड़ों के दर्द, सिरदर्द, दमा, अस्थमा, कमरदर्द, लकवा, अनिद्रा, पीलिया, टीबी, अल्सर, गैस, कब्ज, गंजापन और एसिडिटी का रूप ले सकते हैं।
शुद्धता का अभाव
फल व सब्जियों को उगाने के लिए आजकल पैस्टिसाइट्स का इस्तेमाल होता है। जिससे इनमें खनिज तत्त्वों की कमी हो जाती है। इसके अलावा पीने के पानी को फिल्टर करने की प्रक्रिया से भी इन तत्त्वों की कमी हो जाती है।
पूर्ति के लिए
इन खनिजों की पूर्ति के लिए नेचुरोपैथी में ठंडे पानी में मिनरल ड्रॉप दी जाती है। मरीज को देखने के बाद ही डॉक्टर इस ड्रॉप की बूंदें मरीज के लिए तय करते हैं। इसे लेने के बाद शरीर की सफाई होती है इसलिए पेशाब अधिक आता है।