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Prenatal care: पारंपरिक सब्जियां खाने से कम हो सकता है प्रिमच्योर बर्थ का खतरा

Prenatal care: आज के समय में प्रिमच्योर बर्थ यानि समय से पहले बच्चे का जन्म होना एक आम समस्या बनती जा रही है। इसके लिए कई स्वास्थ्य कारणों के अलावा गर्भवती महिलाओं की जीवनशैली और खानपान भी जिम्मेदार है। हम सभी जानते हैं कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने आहार को लेकर अतिरिक्त सावधान रहना चाहिए। क्योंकि उनका आहार उनके और बच्चे की सेहत पर सीधा असर करता है
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Apr 21, 2020
Prenatal care: Vegetables that Reduce Risk Of Premature Delivery
Prenatal care: पारंपरिक सब्जियां खाने से कम हो सकता है प्रिमच्योर बर्थ का खतरा

Prenatal Care in Hindi: आज के समय में प्रिमच्योर बर्थ यानि समय से पहले बच्चे का जन्म होना एक आम समस्या बनती जा रही है। इसके लिए कई स्वास्थ्य कारणों के अलावा गर्भवती महिलाओं की जीवनशैली और खानपान भी जिम्मेदार है। हम सभी जानते हैं कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने आहार को लेकर अतिरिक्त सावधान रहना चाहिए। क्योंकि उनका आहार उनके और बच्चे की सेहत पर सीधा असर करता है। गर्भवती महिलाओं को एल्कोहल सेवन और धूम्रपान करने से बचना चाहिए। और अपने आहार में फोलेट, लोहा और कैल्शियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए। हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि गर्भावस्था के दौरान कुछ खास सब्जियां खाने से प्रिमच्योर बर्थ ( Premature Birth ) के खतरे को रोका जा सकता है।

क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में पीएचडी कर रहे डेरेजे गेटे ने अध्ययन के लिए लगभग 3,500 महिलाओं के आहार का विश्लेषण किया और पाया कि गर्भाधान के लिए गाजर, फूलगोभी, ब्रोकोली, कद्दू, गोभी, हरी बीन्स और आलू की अच्छी खपत से महिलाओं को पूर्ण गर्भावस्था तक पहुंचने में मदद मिली।

गेटे ने कहा कि ये पारंपरिक सब्जियां एंटीऑक्सिडेंट या एंटी इंफ्लेमेटरी पाेषक तत्वाें से भरपूर हाेने के कारण प्रिमच्योर बर्थ के खतरे काे कम करती हैं।

उन्होंने कहा कि जाे महिलाएं गर्भाधान के बारे में साेच रही हैं उन्हें अपनी डाइट में ये सभी पांरपरिक सब्जियां शामिल करनी चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार समय से पहले पैदा हुए बच्चों में वयस्कता में चयापचय खराबी और पुरानी बीमारियां होने का अधिक जोखिम होता है। और गर्भाधान से पहले से लेकर बच्चे के जन्म तक पांरपरिक सब्जियों का सेवन इस जोखिम को कम कर सकता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
21 Apr 2020 11:10 pm