ओमेगा-3 के नियमित सेवन से रक्त में वसा या ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर नियंत्रित होता है, जिससे हृदय रोगों का जोखिम 50 प्रतिशत तक कम रहता है। नियमित सेवन से आर्थराइटिस से शरीर में सूजन पैदा करने वाले तत्वों का प्रभाव कम होता है।
क्या है रिसर्च : हाल ही में द जर्नल ऑफ अमरीकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित शोध में पाया गया कि ओमेगा 3 फैटी एसिड की गोलियां लेने से हार्ट-अटैक के खतरे को 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। इसका सबसे अच्छा स्रोत फिश ऑयल है। धमनियों के फैलने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने में मदद करता है। नियमित 3 मिग्रा. से ज्यादा प्रयोग से मधुमेह के मरीजों में लो डेनसिटी लिपोप्रोटीन (एलपीएल) कॉलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। विशेषज्ञ ओमेगा फैटी 3 एसिड की गोलियों की जगह फैटी फिश ऑयल के इस्तेमाल की सलाह देते हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट :
ओमेगा फैटी 3 एसिड एन्जाइम्स फैट को घुलने में मदद करते हैं। सी-फिश में ओमेगा 3 फैटी एसिड ज्यादा होता है। शाकाहारी सप्प्लिमेंट व सूरजमुखी का तेल ले सकते हैं। व्यक्ति को वजन के हिसाब से सेवन करना चाहिए। डाइटीशियन या डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि अधिक फैट लेने से यह मोटापे का कारण बनता है। फ्लैक्स जैसे बीज पीस कर पाउडर बनाएं और इसका एक-डेढ़ चम्मच सुबह खाली पेट पानी के साथ खाएं, लाभ होगा।
- डॉ. दीपक माहेश्वरी,सीनियर कॉर्डियोलॉजिस्ट, सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर