
अमरीका के सेन फ्रांसिस्को में शुगर ड्रिंक्स पर कानून बनाने की तैयारी की जा रही है। मोटापा, डायबिटीज व दांतों की समस्या को लेकर इनकी पैकिंग पर वहां पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है। जिसके बाद काफी लोग इसके विकल्प के रूप में चाय व पानी का उपयोग करने लगे हैं। जानते हैं इनसे जुड़े पहलुओं के बारे में:
भारत की स्थिति
भारत में वर्ष 1998 से सॉफ्ट शुगरी ड्रिंक की बिक्री 13 प्रतिशत प्रति वर्ष के हिसाब से बढ़ रही है। जिससे मोटापे व टाइप-2 डायबिटीज की समस्या 24-65 वर्ष की उम्र के लोगों में आम होती जा रही है। यदि इन ड्रिंक्स की बिक्री इसी अनुपात में रही तो वर्ष 2023 तक मोटापे की समस्या 39-49 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
शरीर हो रहा खोखला
विशेषज्ञाें के अनुसार शुगर ड्रिंक ऐसा पेय है जिसमें पोषक तत्व नहीं होते। इसे पीने से शरीर में सिर्फ शक्कर पहुंचती है। ये कई ऐसे पदार्थों से भरपूर होते हैं जो धीरे-धीरे लोगों को इसका आदी बना देते हैं। जिसके कारण व्यक्तिइसे बार-बार लेने लगता है। इन ड्रिंक्स को पीने से शरीर पोषक तत्वों के अभाव में अंदर से खोखला होता जा रहा है।
करती हैं बीमार:
शुगर से भरपूर ये ड्रिंक शरीर के अंदर एक तरह के एसिड का काम करते हैं जिससे अल्सर या कैंसर जैसे रोगों का खतरा रहता है।
खाने के साथ लेने पर:
इसे खाने के साथ लेने से परहेज करना चाहिए। ऐसा करने से पेट जल्दी भर जाता है जिससे खाने के पोषक तत्व शरीर को नहीं मिल पाते।
देसी विकल्प बेहतर:
छाछ, नारियल पानी, शिकंजी, लस्सी, बेल का शर्बत, कैरी का पना, मैंगो शेक या बनाना शेक पी सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय:
कुछ समय पहले विशेषज्ञों ने भारत में डायबिटीज व मोटापे जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए शुगर सॉफ्ट ड्रिंक्स पर टैक्स को बढ़ाने का सुझाव दिया था। उनका कहना था कि इस तरह के पेय पदार्थों पर 20 प्रतिशत टैक्स बढ़ाने पर ही वर्ष 2014-2023 के बीच मोटापे के करीब एक करोड़ 12 लाख नए मामलों को रोका जा सकता है व टाइप-2 डायबिटीज के चार लाख नए मामलों को रोका जा सकता है।
- हर साल दुनियाभर में 2 लाख वयस्क लोगों की मौत शुगर ड्रिंक्स की वजह से होती है। जिनमें सबसे ज्यादा संख्या मैक्सिको और अमरीका के लोगों की है।
- साल 2010 में शुगर ड्रिंक्स पर जारी हुई एक रिपोर्ट के अनुसार 250 ग्राम शुगर ड्रिंक में 50000 कैलोरी होती है।
- साल 2010 में डायबिटीज से डेढ़ लाख, हृदय रोगों से 45 हजार व कैंसर से साढ़े छह हजार लोगों की मौत हो गई थी।