यदि खाने के बाद भी कुछ खाने की तीव्र इच्छा रहती है तो इसे फूड क्रेविंग कहते हैं। तनाव, पानी कम पीने, शरीर में पोषकतत्वों व प्रोटीन की कमी से दिक्कत होती है। लंबे समय से क्रेविंग की वजह से एसिडिटी, अपच व मोटापा बढ़ता है। इसके अलावा क्रेविंग के लिए हंगर हार्मोन्स ग्रेलिन, कोर्टिसोल और लेप्टिन जिम्मेदार होते हैं।

एक शोध के अनुसार रात में पर्याप्त नींद न लेने से ग्रेलिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है। इससे भूख असंतुलित होती है। पर्याप्त नींद न ले पाने से यह दिक्कत बढ़ती है। इसके लिए सात घंटे की गहरी नींद जरूरी है।
तला-भुना नहीं फल खाएं
तला-भुनी चीजें खाने की बजाय मौसमी फल और सब्जियों का प्रयोग करें। हैल्दी फूड ग्रेलिन हार्मोन को बढऩे से रोकता है। यह वसा की मात्रा को स्टोर करता है। इससे वक्त-बेवक्त भूख लगने की समस्या नहीं होती और फास्टफूड खाने से बच जाते हैं।
तनाव न लें, जो पसंद हो वो ही काम करें
तनाव न लें, खुश रहें। तनाव से शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है। इससे भी ज्यादा भूख लगती है। तनाव है तो गहरी सांस लें। पसंदीदा संगीत सुनें। व्यायाम, पसंदीदा कार्य करें।
हार्मोन्स देते संदेश
भोजन करते समय शरीर में एक सूचना प्रक्रिया भी चलती है। भोजन से पेट भरने की सूचना मस्तिष्क तक पहुंचने में 20 मिनट लगते हैं। इसलिए तेजी से खाने वालों को क्रेविंग की दिक्कत ज्यादा होती है।
- लीनेश्वर हर्षवर्धन, फिजिशियन, जयपुर