
Cesarean Delivery In Hindi: प्रेग्नेंसी के दौरान हर महिला यह चाहती है कि उसकी डिलीवरी सामान्य हो। लेकिन कई बार मां या बच्चे की सेहत को खतरा देखकर ऑपरेशन करना पड़ता है, जिसे सिजेरियन डिलीवरी कहते हैं। आइए जानते हैं सिजेरियन डिलीवरी के संबंध में कुछ खास बातें :-
जरूरी इसलिए
- गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर बढ़ने या दौरा पड़ने की स्थिति में सिजेरियन ऑपरेशन किया जाता है वर्ना दिमाग की नसें फट सकती हैं और लिवर व किडनी खराब हो सकती है।
- छोटे कद वाली महिलाओं की कूल्हे की हड्डी छोटी होने के कारण बच्चा सामान्य तरीके से नहीं हो पाता।
- कई बार दवाओं से बच्चेदानी का मुंह नहीं खुल पाता, ऐसे में सर्जरी करनी पड़ती है। ज्यादा खून बहने पर भी सिजेरियन ऑपरेशन किया जाता है। बच्चे की धड़कन कम होने या गले में गर्भनाल लिपटी होने, बच्चे का आड़ा या उल्टा होना, कमजोरी या खून का दौरा कम होने पर भी ऑपरेशन होता है।
- बच्चा जब पेट में ही गंदा पानी (मल, मूत्र) छोड़ देता है जिसे मिकोनियम कहते हैं, इस स्थिति में तुरंत ऑपरेशन कर बच्चे की जान बचाई जाती है।
यह है प्रक्रिया
इस प्रक्रिया में पेट पर चीरा लगाकर बच्चे को गर्भाशय से बाहर निकाला जाता है। सामान्य प्रसव में महिला को 24 घंटे में अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है लेकिन सिजेरियन में कम से कम 5 दिन अस्पताल में रहना पड़ता है।
रखें इन बाताें का ध्यान
- सामान्य प्रसव होने पर दूसरे दिन से ही महिला के शरीर की मालिश की जा सकती है लेकिन सिजेरियन डिलीवरी होने पर कम से कम 45 दिनों तक पेट व कमर की मालिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे सर्जरी के दौरान आए टांकों पर प्रभाव पड़ता है। हालांकि शरीर के अन्य हिस्सों की हल्के हाथ से मालिश की जा सकती है।
- आमतौर पर ऑपरेशन के बाद घर की महिलाएं प्रसूता को टांकें पकने के डर से नहाने के लिए मना कर देती हैं, जो कि गलत है इससे संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए डॉक्टर द्वारा बताए अनुसार साफ-सफाई का ध्यान जरूर रखें।