Epilepsy: मिर्गी को लेकर बहुत-से भ्रम हैं, जिनसे बचते हुए रोगियों का उपचार संभव है। ब्रेन में इलेक्ट्रॉनिक किरणें ज्यादा बनने से दौरे पड़ते हैं। इस दौरान हाथ-पैरों में जकडऩ व मुंह से झाग आने लगते हैं, साथ ही बेहोशी आ जाती है।
Epilepsy: मिर्गी को लेकर बहुत-से भ्रम हैं, जिनसे बचते हुए रोगियों का उपचार संभव है। ब्रेन में इलेक्ट्रॉनिक किरणें ज्यादा बनने से दौरे पड़ते हैं। इस दौरान हाथ-पैरों में जकडऩ व मुंह से झाग आने लगते हैं, साथ ही बेहोशी आ जाती है।
इसलिए होता मिर्गी रोग
ब्रेन में इलेक्ट्रॉनिक किरणें ज्यादा बनने से दौरे पड़ते हैं। इस दौरान हाथ-पैरों में जकडऩ व मुंह से झाग आने लगते हैं, साथ ही बेहोशी आ जाती है।
25 फीसदी में ही समस्या
करीब 25त्न लोगों में ही जन्मजात विकृति, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी या दुर्घटना आदि से मिर्गी रोग होता है। दवा से ठीक हो जाते हैं।
झाडफ़ूंक का रोग नहीं
यह झाड़-फूंक,अंधविश्वास का रोग नहीं है। इसके चक्कर में न रहें। मरीज को जूता या कोई गंदी चीज भी न सुघाएं। मुंह में कुछ न डालें।
धोकर खाएं फल-सब्जियां
फल व सब्जियों में मौजूद कृमियों के कारण सिस्टिसरकोसिस रोग होता है जो मिर्गी का प्रमुख कारण है। सफाई का विशेष ध्यान रखें।
लाइलाज नहीं यह
मिर्गी लाइलाज नहीं है। छह माह से दो साल तक लगातार दवाइयां लेकर उपचार संभव है। जल्द इलाज से ज्यादा लाभ होता है।
सामान्य जीवन जी सकते हैं
मिर्गी रोगी भी सामान्य जीवन जी सकते हैं। वे शादी कर सकते हैं, पैरेंट्स बन सकते हैं। वे पागल नहीं होते और पढ़ाई कर सकते हैं। मिर्गी रोगी व उनके परिजन घबराएं नहीं। अंधविश्वास आदि में न पड़ें और तुरंत इलाज लें। इसका एक कारण सिर में चोट लगना भी होता है, अत: हेलमेट लगाकर ही बाइक चलाएं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।