रोग और उपचार

Health News: बच्चों को खुश रखने के लिए न खिलाएं ज्यादा मीठा, हो सकती है ये खतरनाक बीमारी

Health News: हम अक्सर यह देखते है छोटे बच्चे चॉकलेट, टॉफी या खाने की कोई मीठी चीज देखकर मचल उठता है। बच्चों का खुश करने के लिए माता-पिता उसे ये चीजें दिला भी देते हैं। लेकिन क्या आपकों पता है शुगर एडिक्शन (कैंडी, चॉकलेट, मिठाई, दूध में अधिक चीनी) चीजें अधिक मात्रा में खाने से कैविटी (दांतों का खोखला होना) की परेशानी होने लगती है।
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Updated: 2 Aug 2021, 11:22 PM IST
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Health News: हम अक्सर यह देखते है छोटे बच्चे चॉकलेट, टॉफी या खाने की कोई मीठी चीज देखकर मचल उठता है। बच्चों का खुश करने के लिए माता-पिता उसे ये चीजें दिला भी देते हैं। लेकिन क्या आपकों पता है शुगर एडिक्शन (कैंडी, चॉकलेट, मिठाई, दूध में अधिक चीनी) चीजें अधिक मात्रा में खाने से कैविटी (दांतों का खोखला होना) की परेशानी होने लगती है।

जिसके वजह से छोटे बच्चों के दांतो समय से पहले ही गिरने लगते है। असमय दांत गिरने के बाद नए दांत टेढे-मेढ़े निकलते हैं जिससे चेहरा बेडौल होने लगता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार बच्चे-बड़ों को दिनभर में छह चम्मच से ज्यादा चीनी नहीं खानी चाहिए।

क्या है शुगर एडिक्शनकोई भी बच्चा जब शुगर से भरपूर चीजें (कैंडी, चॉकलेट, मिठाई, दूध में अधिक चीनी) खाता है तो उसके दिमाग में डोपामाइन हार्मोन स्त्रावित होने लगता है जो खुशी का अहसास कराता है। इसलिए धीरे-धीरे बच्चे का मीठी चीजों के प्रति लगाव बढ़ जाता है। इसे शुगर एडिक्शन कहते हैं।

अधिक मीठा खाने से होने वाले नुकसान
पाचनतंत्र प्रभावित : समय पूर्व बेबी टीथ गिरने के बाद बच्चा हर चीज को बिना चबाए निगलता है। इससे पाचनतंत्र गड़बड़ाता है। टेढ़े-मेढ़े दांत : बेबी टीथ स्थायी दांत को निकलने में मदद करते हैं। लेकिन शुगर की लत से दांत टेढ़े-मेढ़े व कमजोर भी होते हैं।संक्रमण : दांतों में कैविटी बनने पर बैक्टीरिया अधिक पनपते हैं जो मुंह में संक्रमण और मसूढ़ों में दर्द का कारण भी बनते हैं।

ये करें उपाय

रोजाना ब्रशिंग : टूथपेस्ट कम लगाकर सॉफ्ट ब्रसल वाले टूथब्रश से रोजाना ब्रश कराएं। सुबह-शाम दांत साफ करें।

जूस नहीं, पानी पिलाएं : कई बार मांएं बच्चे को प्यास लगने पर जूस या सॉफ्ट ड्रिंक्स देती हैं, जो सही नहीं है। इससे मोटापा बढऩे, संक्रमण का खतरा रहता है। बच्चे को मीठे फल जैसे सेब मसलकर दिया जा सकता है ताकि उनके शरीर में नेचुरल शुगर की पूर्ति हो सके।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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