
अक्सर पेरेंट्स बच्चों को मीठे का स्वाद चखाने के लिए मिठाई के अलावा चॉकलेट खिला देते हैंं। लेकिन क्या आपको पता है उन्हें चॉकलेट खिलाने की भी एक निश्चित उम्र होती है। कम उम्र में आमतौर पर उनका पाचनतंत्र इतना मजबूत नहीं होता कि चॉकलेट में मौजूद तत्त्वों को आसानी से पचा सके। जानतें हैं कब खिला सकते हैं चॉकलेट -
24 माह यानी 2 साल बाद ही खिलाएं
मीठे के नाम पर बच्चों को सबसे ज्यादा पसंद आती है चॉकलेट। लेकिन इसमें मौजूद कैफीन तत्त्व का काम शरीर के अंगों के न्यूरोन्स को उत्तेजित करना होता है। ऐसे में 2 साल से छोटे बच्चों को यदि इसे खाने की आदत होगी तो उनका कमजोर पाचनतंत्र तेजी से काम करेगा जो कि उनकी सेहत के लिए नुकसानदेह है। साथ ही इस उम्र में चॉकलेट आदि से मसूढ़े कमजोर हो सकते हैं।
फायदे भी हैं
एंटीऑक्सीडेंट्स के अलावा चॉकलेट में फ्लेवेनॉल्स नामक तत्त्व होता है जो शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद है। ऐसे में चॉकलेट खाने के दौरान यह तत्त्व दिमागी कार्यक्षमता को बढ़ाने के साथ ही रक्तसंचार बेहतर करता है और ब्लड क्लॉट जमने से रोकता है। वहीं एंटीऑक्सीडेंट विभिन्न अंगों की कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है। साथ ही प्रमुख हार्मोन को स्त्रावित करने में मददगार साबित होता है।
चॉकलेट मिल्क है सही
मार्केट में खासतौर पर बच्चों के लिए चॉकलेट पाउडर मिलते हैं जिसे आप दूध में मिलाकर चॉकलेट मिल्क के रूप में दे सकते हैं। इसका फायदा है कि इससे शरीर में कैफीन की मात्रा सीमित जाएगी। खास बात है कि इनमें अन्य सूक्ष्म पोषक तत्त्व भी होते हैं।
एलर्जी का खतरा
कई मामलों में चॉकलेट में मौजूद तत्त्व बच्चे के लिए एलर्जी का कारण बन सकते हैं। ऐसे में यदि चॉकलेट खाने पर बच्चे को त्वचा पर जलन, रैशेज, पेट में दर्द, उल्टी, मिचली, चेहरे पर सूजन और अत्यधिक थकान महसूस हो तो ये एलर्जी के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए इनकी समय पर पहचान कर शिशु को इससे परहेज कराएं।
सावधानी
चॉकलेट के मामले में इस बात को ध्यान रखें कि सोने से आधा या एक घंटा पहले शिशु को चॉकलेट नहीं खिलानी चाहिए वर्ना पेट से जुड़ी समस्या हो सकती है। इसमें खास है इरिटेबल बाउल सिंड्रोम।