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Health Tips: इन फलों के छिलको में छिपे हैं कई औषधीय गुण, जानें सेहत के लिए कितने गुणकारी

Health Tips: अक्सर लोग महंगे भाव के फल व सब्जियां लाते हैं और उन्हें खा लेते हैं, लेकिन उपयोगिता से अनजान होने के कारण हम उनके बेहद गुणकारी छिलकों को...
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Updated: 24 Aug 2021, 11:14 PM IST
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Health Tips: अक्सर लोग महंगे भाव के फल व सब्जियां लाते हैं और उन्हें खा लेते हैं, लेकिन उपयोगिता से अनजान होने के कारण हम उनके बेहद गुणकारी छिलकों को या तो कचरे में फेंक देते हैं या फिर जानवरों को खिला देते हैं। अगर आपको इन फलों व सब्जियों के छिलकों में छिपे गुणों का पता चल जाए तो आप शायद ही उन्हें फेंकने की गलती करें।

सेब

सेब में एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है। लेकिन गूदे से पांच गुना ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट इसके छिलके में होता है। जर्नल ऑफ एग्रीकल्चर एंड फूड कैमिस्ट्री के शोधकर्ताओं ने पाया कि इसके छिलकों में एंटी डिजीज व एंटी कैंसर जैसे गुण होते हैं। इसलिए सेब को छिलके समेत ही खाएं।

केला

ताईवान के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि केले का छिलका डिप्रेशन से मुकाबला करता है। इसलिए कच्चे केले की सब्जी बनाते समय छिलका न हटाएं।

अनार

जिन महिलाओं को अधिक मासिक स्राव होता है, वे अनार के सूखे छिलकों को पीसकर एक चम्मच पानी के साथ लें। इससे रक्तस्राव कम होगा। बवासीर की शिकायत हो तो अनार के छिलकों को कूटकर इसके पाउडर को गुड़ में मिलकार बारीक-बारीक गोलियां बना लें। कुछ दिन तक इनका प्रयोग करें, आराम मिलेगा।

अंगूर, बेरी

अमरीकी वैज्ञानिक व कैमिस्ट वालेस एच.योकोयामा ने अध्ययन में पाया कि अंगूर और बेरी के छिलकों में कोलेस्ट्रॉल घटाने की क्षमता होती है। अमरूद के छिलकों में एंटीऑक्सीडेंट गूदे से कहीं ज्यादा होते हैं। इसलिए अंगूर या बेरी का जूस बनाने की बजाय इन्हें साबुत ही खाना चाहिए।

सब्जियां

छिलके सहित सब्जियां खाने से कब्ज व डायबिटीज कंट्रोल होती है।

आलू

स्वाद और सेहत के लिए आप आलू तो खाते ही होंगे लेकिन क्या आपने कभी आलू का छिलका खाने के बारे में सोचा है। अगर अब तक नहीं सोचा है तो अब साचिए ज्यादातर घरों में आलू को छीलने के बाद छिलके को कूड़े मे फेंक दिया जाता है। लेकिन अगर आप आम के आम और गुठलियों के दाम वसूलना चाहते हैं तो आलू के साथ ही उसके छिलके को भी उपयोग में लाना शुरू कर दे।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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