
बच्चों को होने वाली ज्यादातर बीमारियों में पेट में कीड़ों की समस्या भी आम है। अधिकांश मामलों में बड़े भी इससे पीडि़त होते हैं। हाल ही इस दिक्कत से निजात दिलाने के लिए बच्चों को दवाएं भी दी गई लेकिन कुछ को इसकी ओवरडोज और खाली पेेट देने के दुष्प्रभाव भी सामने आए। आइए जानते हैं इस रोग से जुड़ी बातों व सावधानियों के बारे में-
लक्षण
बार-बार पेटदर्द, खून की कमी, शारीरिक कमजोरी, भूख न लगना, थकान, अपच, मलद्वार पर खुजली, आंतों में गड़बड़ी, लगातार वजन कम होना और लंबे समय तक कब्ज या दस्त आदि दिक्कतें। पेट में कीड़ों की समस्या के दौरान शरीर में विशेषतौर पर विटामिन, मिनरल, आयरन और फॉलिक एसिड की कमी भी हो जाती है जो पाचनक्रिया से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा देती है।
वजह
पेट में कीड़े यानी डीवॉर्मिंग का मुख्य कारण गंदा पानी व मिट्टी है। गंदे स्थान पर उगी सब्जियां व फल इसकी वजह बनते हैं। भोजन बनाते समय अच्छी तरह से न धोई गई सब्जियां, कच्चा सलाद, गंदे हाथों से कटे फल व खाद्य सामग्री, गंदे नाखून, शौच के बाद या भोजन करने से पहले व बाद में हाथों को अच्छी तरह से न धोना और आसपास में मौजूद गंदगी इस रोग को जन्म देती है। अधपके मांसाहार से भी इस समस्या की आशंका रहती है। इसलिए कुछ भी खाने से पहले हाथों को साबुन से धोएं।
एल्बेंडाजोल है कारगर
प्रमुख रूप से पेट के कीड़ों को खत्म करने वाली एल्बेंडाजोल दवा से उपचार किया जाता है। इससे मरीज को दुष्प्रभाव कम होने की आशंका रहती है। यह दवा एक साल से कम उम्र के बच्चे को नहीं दी जाती। १-२ वर्ष की आयु वालों को २०० मिली और दो साल से बड़ों को इसकी ४०० मिली की मात्रा देते हैं। सामान्यत: इस दवा की एक ही डोज देते हैं। इसके अलावा प्राजिक्वेंटल, मेबांडाजोल आदि दवाओं से भी पेट के कीड़ों की समस्या दूर की जाती है। ध्यान रखें: घर में किसी को यह परेशानी है तो अन्य लोग बचाव के तौर पर दवा लें। साफ-सफाई का ध्यान रखें। कच्चे फल व सब्जियों को धोकर प्रयोग करें।
होम्योपैथिक उपचार
होम्योपैथी में इस समस्या में मरीज को लक्षणों के अलावा स्वभाव व आदतों के आधार पर दवाएं देते हैं। जैसे यदि बच्चा दुबला, संवेदनशील हो और वह मोशन के बाद मलद्वार पर खिंचाव महसूस करे। कच्ची सब्जियां व गर्म भोजन करने की आदत हो तो पेट के कीड़े नष्ट करने के लिए इग्नीशिया दवा देते हैं। जिन्हें थोड़ी देर में थकान, दूध पीने से तकलीफ, सुबह के समय पेटदर्द हो तो मैग्नीशियम न्यूर दवा देते हैं।
जो बच्चे चिड़चिड़े हों व बार-बार मोशन जाने की इच्छा जताएं तो नक्सवोमिका दवा से कीड़ों की परेशानी को दूर किया जाता है। साथ ही ऐसे बच्चे जिन्हें भीड़भाड़ में रहना नापसंद हो, चेहरा अक्सर लाल व फूला हो और हथेली गर्म व तलवे ठंडे रहें उन्हें साइलीसिया दवा देते हैं।
आयुर्वेदिक उपचार
जड़ी-बूटियों से तैयार पाउडर को पेट के कीड़ों को दूर करने में इस्तेमाल किया जाता है।
कम्पिलक (कबीला भी कहते हैं) या वायविडंग पाउडर बच्चों को १/४ चम्मच एक चम्मच शहद के साथ देते हंै। बच्चों को सोने से पहले कोई मीठी चीज खिलाकर ही यह पाउडर लेने की सलाह देते हैं ताकि दवा के असर से पहले कीड़े सक्रिय हो जाएं।
अचार के रूप में बनाई जाने वाली गाजर की कांजी का पानी पीने से पेट के कीड़े निष्क्रिय हो जाते हैं।
अरंडी का तेल आधे चम्मच की मात्रा में दूध में मिलाकर पीने से पेट साफ होता है।
दोपहर के भोजन के बाद छाछ पीना भी लाभदायक है।