रोग और उपचार

यूरिन संबंधी दिक्कत को न करें नजरअंदाज, हो सकती है गंभीर समस्या

यूरिनरी स्ट्रिक्चर में यूरिन की नली चोट लगने पर कट जाती है और यूरिन पास नहीं होता है जिससे भीतर ही भीतर संक्रमण फैलने लगता है।
2 min read
• •
Dec 05, 2019
यूरिन संबंधी दिक्कत को न करें नजरअंदाज, हो सकती है गंभीर समस्या
Urethroplasty surgery

सड़क हादसे या किसी अन्य तरह की चोट के बाद पुरुषों में अचानक यूरिन संबंधी समस्या हुई है तो 90 फीसदी यूरिन स्ट्रिक्चर यानि पेशाब नली के कटने या डैमेज होना इसका कारण होता है। यूरिनरी स्ट्रिक्चर में यूरिन की नली चोट लगने पर कट जाती है और यूरिन पास नहीं होता है जिससे भीतर ही भीतर संक्रमण फैलने लगता है।

बीस सेमी. लंबी होता है यूरेथ्रा -
पुरुषों में यूरेथ्रा (पेशाब नली की लंबाई) करीब बीस सेमी. जबकि महिलाओं में करीब चार सेमी. होती है। चोट लगने या कूल्हे की हड्डी टूटने पर यूरेथ्रा डैमेज होता है। स्ट्रिक्चर दो सेमी. तक का है तो दूरबीन से ऑपरेट कर ठीक करते हैं। दो सेमी. से अधिक है तो बड़े ऑपरेशन से चीरा लगाकर इलाज करते हैं।

गाल की त्वचा से करते ग्राफ्टिंग -
स्ट्रिक्चर दूर करने के लिए यूरेथ्रोप्लास्टी करते हैं। इसमें रोगी के गाल के भीतर की त्वचा जिसे म्यूकोसा कहा जाता है उससे नया यूरेथ्रा बनाकर खराब हो चुके यूरेथ्रा को निकालकर दोनों हिस्सों के बीच जोड़ते हैं। जीभ के निचले हिस्से जिसे बकल म्यूकोसा कहते हैं उस त्वचा की ग्राफ्टिंग से पेशाब की नई नली बनाई जाती है।

गुुटखा खाने वालों में थोड़ी मुश्किल -
जो लोग गुटखा, पान मसाला, तंबाकू या सिगरेट पीते हैं उन्हें स्ट्रिक्चर की समस्या हुई तो उनके गाल की म्यूकोसा का इस्तेमाल नहीं हो पाता है। इसका कारण है पान मसाला खाने की वजह से म्यूकोसा की ऊपरी परत खराब हो जाती है। इससे यूरेथ्रोप्लास्टी करने से संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में ब्लैडर के कुछ हिस्से को काटकर यूरेथ्रा बनाते हैं।

इन लक्षणों को पहचान लें -
इंजरी होने के बाद यूरिन का अचानक से बंद हो जाना, पेट फूलने लगना, पेशाब के रास्ते खून आना, पेट में तेज असहनीय दर्द के साथ बहुत अधिक बेचैनी और घबराहट होना इस समस्या के प्रमुख लक्षण हैं।

इमरजेंसी में ऐसे देते हैं राहत -
स्ट्रिक्चर होने पर राहत के लिए पेट में छोटा छेद कर ब्लैडर में पाइप लगाकर यूरिन पास कराते हैं। सड़क हादसे में घायल मरीज को बारह घंटे तक यूरिन पास नहीं हुआ तो एंडोस्कोप से कैथेटर डालकर यूरिन पास कराते हैं।

मरीज की ये जांचें की जाती हैं -
स्ट्रिक्चर पता करने के लिए रेट्रोग्रेड यूरेथ्रोस्कोपी जांच करते हैं। इसमें रोगी के पेशाब के रास्ते दवा डालकर एक्स-रे करते हैं जिससे भीतर की पूरी चीज साफ दिखती है। कई बार अल्ट्रासाउंड जांच से भी ब्लैडर और यूरेटर को देखते हैं। किसी कारण से दोबारा चोट लग गई तो दूरबीन से 'री-डू यूरेथ्रोप्लास्टी' तकनीक से तकलीफ ठीक करते हैं।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
05 Dec 2019 02:26 pm