-जेईएन, एईएन अपनी जिम्मेदार थोप रहे अधिनस्थ पर -खतरा जानने के बाद भी नहीं है किसी को परवाह
दरअसल, जिले में पिछले दिनों विद्युत हादसे दो लोगों की मौत हो गई। हालांकि इसके बाद निगम ने कार्मिकों को निर्देशित किया, फिर भी कार्य में बदलाव नहीं हुआ है। विभाग ने संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की। अब तक शटडाउन कार्य में जेईएन की तरफ से अन्य कार्मिकों को भेजा जा रहा है। इससे फोन पर शटडाउन की प्रक्रिया से कई बार समय से पहले लाइन शुरू हो जाती है। ऐसे में व्यक्ति हादसे का शिकार हो जाता है। बताया जा रहा है कि कम्यूनिकेशन गेप के चलते भी हादसे हो रहे हैं। यहां तक बिजली लाइन पर कार्य करने वाले कार्मिक का मोबाइल फोन स्वीच ऑफ होने की स्थिति में यहां वहां बातचीत कर लाइन को शुरू कर देने का कार्य विभाग को कभी भी भारी पड़ सकता है।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ११ केवी लाइन शुरू कराने व शटडाउन जेईएन ही ले सकता है। जीएसएस पर इसे इंद्राज करना पड़ता है। इसका सत्यापन करना पड़ता है। ३३ केवी लाइन सहायक अभियंता व अधिशाषी अभियंता की तरफ से शटडाउन ली जा सकती है। लेकिन हकीकत यह है कि अधिकतर स्थानों पर फोन पर जानकारी लेकर तकनीकी कर्मचारी को भेज दिया जाता है। फोन नहीं लगने की स्थिति में कई बार ऐसे ही स्वत: बिजली शुरू कर दी जाती है। बाद मेंं जीएसएस पहुंंच कर शटडाउन के संबंध में इंद्राज कर दिया जाता है।
निगम सूत्रों का कहना है कि शटडाउन लेने की प्रक्रिया में क्रॉस लाइन वाले स्थानों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे कार्य करने केे दौरान कार्मिक घायल हो रहे हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों मेें लाइन क्षेत्र का लंबा होने के कारण फोन पर ही कार्य हो रहा है। यह जान जोखिम वाली स्थिति है। जिन लोगों को तकनीकी जानकारी नहीं है, वह खुद कार्य कर रहे हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
-एनएल साल्वी, अधीक्षण अभियंता, एवीवीएनएल, डूंगरपुर