राजस्थान दिवस समारोह के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की जनसभा के दौरान गैस सिलेंडरों की किल्लत ने आयोजकों को पसीने ला दिए। आलम यह रहा कि 13,000 लोगों का खाना गैस के बजाय लकड़ी के पारंपरिक चूल्हों पर पकाया गया।
राजस्थान में इन दिनों घरेलू और कमर्शियल एलपीजी (LPG) गैस किल्लत की खबरों का सबसे ताज़ा और बड़ा उदाहरण वागड़ के डूंगरपुर जिले में देखने को मिला। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सोमवार को होने वाली जनसभा के लिए जब हजारों लोगों का खाना तैयार करना था, तो कमर्शियल सिलेंडरों की भारी कमी के कारण आयोजकों को वापस लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ा।
आयोजन से जुड़े स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि सभा में जुटने वाले करीब 13,000 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए कम से कम 30 कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता थी। लेकिन बाजार में चल रहे सप्लाई संकट के कारण विभाग बमुश्किल 3 से 4 सिलेंडर ही मुहैया करा पाया।
जब गैस का इंतजाम नहीं हुआ, तो आयोजकों के पास कोई विकल्प नहीं बचा। अंततः आनन-फानन में भारी मात्रा में लकड़ी मंगवाई गई और पारंपरिक चूल्हों पर बड़े-बड़े कड़ाहों में खाना तैयार किया गया।
डूंगरपुर के जिला रसद अधिकारी (DSO) ओम प्रकाश ने इस स्थिति पर सफाई देते हुए कहा कि कमर्शियल सिलेंडरों की फिलहाल भारी किल्लत है। उन्होंने बताया, "अगर हम इतनी बड़ी संख्या में खाना पकाने के लिए घरेलू सिलेंडरों का उपयोग करते, तो यह नियमों के विरुद्ध होता और एक बड़ा विवाद खड़ा हो सकता था। इसलिए, हमने लकड़ी जलाकर भोजन तैयार करने का निर्णय लिया।"
यह समस्या सिर्फ डूंगरपुर तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरे राजस्थान में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति मांग की तुलना में अभी भी 20% कम चल रही है।
रसद अधिकारियों का मानना है कि घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति फिर भी पर्याप्त है, लेकिन कमर्शियल सेगमेंट में भारी गैप है। इसके चलते होटल मालिकों, हलवाइयों और बड़े आयोजनों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में भव्य आयोजन किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का दौरा होने के कारण जिला प्रशासन पर दबाव अधिक था। हालांकि, लकड़ी के चूल्हों पर खाना पकाकर समय पर भोजन तैयार कर लिया गया, लेकिन इस घटना ने प्रदेश में ईंधन की सुरक्षा और रसद विभाग की तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिया है।
वीआईपी इवेंट में जहां हाई-टेक सुविधाओं की उम्मीद की जाती है, वहां धुएं के बीच खाना पकाते हलवाइयों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। लोग इसे एक तरफ 'देसी राजस्थान' की झलक बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन की विफलता के रूप में देख रहे हैं।