डूंगरपुर

Gold-Silver Price Hike: राजस्थान के इस समाज ने लगाया रिंग सेरेमनी समेत कई आयोजनों पर बैन, सिर्फ इतना सोना दे सकेंगे बेटी को

Marriage expense limit Rajasthan: संघ ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से उखाड़ने के लिए 28 सूत्रीय 'संस्कार नियमावली' लागू कर दी है। इस पहल का सीधा मकसद शादी-ब्याह को सादगीपूर्ण बनाना और गरीब परिवारों को कर्ज के दलदल से बचाना है।
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आज के दौर में जहां मध्यमवर्गीय परिवार शादियों के खर्च और सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों से दबा जा रहा है, वहीं राजस्थान के डूंगरपुर से समाज सुधार की एक ऐसी बयार चली है जो पूरे देश के लिए मिसाल बन सकती है। राजस्थान आदिवासी संघ ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से उखाड़ने के लिए 28 सूत्रीय 'संस्कार नियमावली' लागू कर दी है। इस पहल का सीधा मकसद शादी-ब्याह को सादगीपूर्ण बनाना और गरीब परिवारों को कर्ज के दलदल से बचाना है।

आसमान छूते भाव और समाज का सख्त पहरा

फरवरी 2026 में सोने और चांदी की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर हैं। जहां आम आदमी के लिए एक तोला सोना खरीदना भी चुनौती बन गया है, वहीं आदिवासी संघ ने मर्यादा तय कर दी है। संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सुखलाल अहारी ने स्पष्ट किया कि अब समाज में होने वाली शादियों में अधिकतम 30 तोला चांदी और सोना ही मान्य होगा। इसके अलावा नकद राशि (दहेज/टीका) की सीमा भी 15,051 रुपये तय कर दी गई है। यह कदम सीधे तौर पर उन परिवारों को राहत देगा जो सामाजिक दबाव में आकर अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने को मजबूर थे।

रिंग सेरेमनी और डीजे पर लगा 'बैन'

संघ ने आधुनिकता के नाम पर बढ़ रही कुरीतियों जैसे रिंग सेरेमनी, साफा प्रथा, बर्थडे पार्टी और शादियों में डीजे बजाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। सबसे महत्वपूर्ण फैसला शराब को लेकर लिया गया है। किसी भी आयोजन में शराब परोसना अब पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। संघ का मानना है कि नशा और फिजूलखर्ची ही समाज के पिछड़ेपन का मुख्य कारण हैं।

नियम तोड़ा तो 51 हजार का जुर्माना

संघ के प्रदेश अध्यक्ष भूपत सिंह भगोरा ने चेतावनी दी है कि इन नियमों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। यदि कोई इन निर्णयों की अवहेलना करता है, तो उस पर 51,000 रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, गंभीर उल्लंघन की स्थिति में व्यक्ति को समाज से बहिष्कृत भी किया जा सकता है। हालांकि, संगठन ने यह लचीलापन रखा है कि यदि कोई सक्षम परिवार बंद कमरे में निजी तौर पर अधिक लेनदेन करता है, तो उस पर संघ हस्तक्षेप नहीं करेगा, लेकिन सार्वजनिक प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं होगा।

शिक्षा पर जोर और अपराध पर चोट

इस नई नियमावली में सिर्फ पाबंदियां ही नहीं हैं, बल्कि भविष्य का रोडमैप भी है। संघ ने बालिका शिक्षा को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देने का संकल्प लिया है। साथ ही, समाज ने यह भी साफ कर दिया है कि अपराधी और असामाजिक तत्वों के लिए समाज में कोई जगह नहीं होगी।

Updated on:
12 Feb 2026 11:13 am
Published on:
12 Feb 2026 11:12 am