नगर निगम में स्ट्रीट लाइट को लेकर अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सरकार ने पथ प्रकाश योजना के तहत निगम को 1096 एलइडी लाइट उपलब्ध कराया है। इन्हें बंद पड़ चुके पूर्व की लाइटों की जगह स्ट्रीट पोल में लगाए जाने हैं।
दुर्ग . नगर निगम में स्ट्रीट लाइट को लेकर अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सरकार ने पथ प्रकाश योजना के तहत निगम को 1096 एलइडी लाइट उपलब्ध कराया है। इन्हें बंद पड़ चुके पूर्व की लाइटों की जगह स्ट्रीट पोल में लगाए जाने हैं। एलइडी महीने भर पहले ही उपलब्ध करा दिए गए थे, लेकिन अफसरों ने अब तक इन्हें पोल पर लगाना शुरू नहीं करवाया है। इस कारण रात में सड़कों पर अंधेरा पसरा रहता है।
पहले से लगी लाइट में एक हजार से अधिक खराब
इससे पहले 10.64 करोड़ की लागत से शहर के 18 हजार 164 स्ट्रीट पोल पर एलइडी लाइट लगाए गए हंै। इनमें से 1 हजार से ज्यादा एलइडी खराब हो गए हैं। इन लाइटों को ठेका कंपनी को बदलकर देना है, लेकिन कंपनी काम नहीं कर रही। इससे चलते गौरव पथ सहित शहर के कई हिस्सों में करीब 6 माह से अंधेरा परसा है।
जिस कंपनी की जवाबदारी वह नहीं कर रही मेंटनेंस
पूर्व में लगाए गए लाइट्स के लिए नगर निगम ने इनर्जी इफिसियेंसी सर्विसेस लिमिटेड (ईईएसएल) रायपुर से अनुबंध किया है। इसके तहत 18 , 35 व 110 वॉट की एलइडी लगाए गए हैं। ठेका कंपनी पर लाइट लगाने के साथ 7 साल तक मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ह, ैफिर भी कंपनी मरम्मत नहीं कर रही है। दूसरी ओर निगम के अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
गुणवत्ता को लेकर भी शिकायत
एलइडी की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायत की जाती रही है। पार्षदों ने इसकी शिकायत कलक्टर से भी की है। अधिकतर जगहों में 35 की जगह 18 वोल्ट के बल्ब लगा दिए गए हैं।
लाइट मिली तो श्रेय के लिए होड़, अब ध्यान नहीं
शासन द्वारा एलइडी लाइट भेजे जाने के बाद श्रेय की होड़ में विधायक अरुण वोरा व महापौर चंद्रिका चंद्राकर आमने सामने हो चुके हैं। शासन द्वारा भेजे गए एलइडी लाइट्स निगम के गोडाउन में रखे हैं। विधायक 27 अगस्त को समर्थकों के साथ यहां निरीक्षण के लिए पहुंच गए और खुद स्वीकृत कराने का दावा करते हुए बयान जारी किया। इससे महापौर व एमआइसी सदस्य बिगड़ गए और उन्होंने भी बयान जारी कर विधायक पर झूठी वाहवाही लेने का आरोप लगाया।
एमआइसी के निर्देश पर भी नहीं दिया ध्यान
शासन से एलइडी मिलने के बाद भी स्ट्रीट पोल पर नहीं लगाने का मामला एमआइसी की बैठक में भी उठ चुका है। एमआइसी सदस्यों ने इस पर अफसरों को फटकार लगाई थी और त्योहारी सीजन को देखते हुए जल्द से जल्द पोल पर लगाने के निर्देश दिएथे, लेकिन अफसरों ने गिनती के पोल पर लाइट लगाकर खानापूर्ति कर ली।
निगम गंभीर नहीं
नगर निगम मेें नेता प्रतिपक्ष लिखन साहू का कहना है कि स्ट्रीट लाइट को लेकर निगम प्रशासन शुरू से ही गंभीर नहीं रहा है। पहले घटिया व कम वोल्टेज की लाइट लगा दी गई। लाइट खराब हुई तो मेंटेनेंस तक नहीं कराया गया। अब सरकार से लाइट मिली है तो इसे लगाया नहीं जा रहा है। सत्ता पक्ष द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने के कारणयह स्थिति बन रही है।
लाइट लगाने का काम शुरू
महापौर चंद्रिका चंद्राकर का कहना है कि शासन से लाइटें मिली है। लाइट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। निगम प्रशासन जनता की सुविधाओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है।