ताजा मामला गोशाला नहीं बल्कि गांव के कांजीहाउस का है, जहां भरी बरसात में खुले आसमान के नीचे गायों की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई है।
दुर्ग. छत्तीसगढ़ में भूख-प्यास से गायों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। पहले भी सरकारी अनुदान प्राप्त गोशालाओं में भूख-प्यास से तड़प कर सौकड़ों गायों की मौत हो चुकी हैं। ताजा मामला गोशाला नहीं बल्कि गांव के कांजीहाउस का है, जहां भरी बरसात में खुले आसमान के नीचे गायों की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार ग्राम रवेलीडीह के कांजीहाउस में नौ गायों की मौत हो गई। खास बात यह है मौत के बाद गायों का शव जिम्मेदारों ने चुपचाप गांव से बाहर मैदान में ले जाकर छोड़ दिया। दोपहर बाद ग्रामीणों ने एक साथ इतनी गायों का शव देखा तो शक हुआ और पतासाजी करने पर घटना का खुलासा हुआ।
लोहे के खंबे व तार का घेरा बनाकर अस्थायी कांजी हाउस
रवेलीडीह के ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा स्थानीय व्यवस्था के तहत कांजीहाउस का संचालन किया जाता है। इसके लिए गांव के बाहर खुले आसमान के नीचे लोहे के खंबे व तार का घेरा बनाकर अस्थायी कांजी हाउस का निर्माण किया गया है। यहीं इन गायों को बंद रखा गया था। सोमवार को कुछ ग्रामीणों ने इन गायों को कांजी हाउस के भीतर मरनासन्न देखा था। माना जा रहा है कि सोमवार की रात इन गायों की मौत हो गई, जिसे छिपाने की नीयत से चुपचाप मैदान में छोड़ दिया गया।
वहां चारा न पानी की व्यवस्था
ग्रामीणों ने बताया कि अस्थायी कांजी हाउस में न तो मवेशियों के लिए चारा रखा जाता है और न ही पीने की पानी की कोई व्यवस्था है। मवेशियों को खुले आसमान के नीचे छोड़ दिया जाता है। माना जा रहा है कि भूख-प्यास व खुले आसमान के नीचे रखे जाने के कारण मवेशियों की मौत हुई होगी।
नहीं दी सूचना, मामला संदिग्ध
ग्रामीणों की मानें तो मंगलवार को मृत गायों को चुपचाप गांव के बाहर मैदान में छोड़ दिया। इसकी सूचना ग्रामीणों के अलावा किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को भी नहीं दी गई। इससे मामला संदिग्ध हो गया है। एक साथ नौ गायों की मौत से ग्रामीण आशंकित भी है।
पंचायत द्वारा कांजी हाउस का संचालन नहीं
रवेलीडीह के सरपंच सुनीता दुबे ने कहा कि गायों की मौत के संबंध में मुझे कोई भी जानकारी नहीं है। इस संबंध में किसी ने बताया नहीं है। पंचायत द्वारा कांजी हाउस का संचालन नहीं किया जा रहा।