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Durg University: न्यूनतम के स्थान पर प्रिंट किया अधिकतम अंक, LLB की सैकड़ों मार्कशीट बर्बाद

दरअसल, विवि ने दिसंबर में प्रथम सेमेस्टर एलएलबी परीक्षा की मार्कशीट अभी विद्यार्थियों तक पहुंचाई। उसमें लापरवाही का यह मामला सामने आ गया।
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Updated: 14 Oct 2017, 10:42 AM IST
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भिलाई. दुर्ग विश्वविद्यालय के एलएलबी विद्यार्थियों को अपनी मार्कशीट वापस लौटानी पड़ेगी। विवि का परीक्षा संबंधी कामकाज संभाल रही एजेंसी ने मार्कशीट टेबुलेशन और प्रिंटिंग में बड़ी गड़बड़ी कर दी है। मार्कशीट में न्यूनतम अंकों के स्थान पर अधिकतम अंक लिखे गए हैं यानि अंकों का कॉलम ही बदल गया।

दरअसल, विवि ने दिसंबर में प्रथम सेमेस्टर एलएलबी परीक्षा की मार्कशीट अभी विद्यार्थियों तक पहुंचाई। उसमें लापरवाही का यह मामला सामने आ गया। बताते हैं कि करीब तीन सौ विद्यार्थियों की गलत मार्कशीट प्रिंट हुई है, जिससे विवि को आर्थिक नुकसान भी हुआ।

विद्यार्थियों ने की शिकायत, प्राध्यापक भी हुए परेशान
कॉलेजों में मार्कशीट पहुंचने के बाद जब प्राध्यापकों ने इसे देखा तो हैरान रह गए। इसी तरह विद्यार्थियों ने भी शिकायत की। इसके बाद प्राध्यापकों ने विवि प्रशासन को मार्कशीट में हुई गलती से वाकिफ कराया। अधिकारी हरकत में आए सभी एलएलबी कॉलेजों को मार्कशीट वापस भेजने के लिए सूचित किया।

संभाग में चार कॉलेजों में एलएलबी की पढ़ाई होती है। मार्कशीट आने के बाद कॉलेजों ने बहुत से विद्यार्थियों को वितरित भी कर दी है। अब विवि के निर्देश पर कॉलेज विद्यार्थियों से उनकी गलत मार्कशीट वापस लेकर विवि पहुंचाएंगे।

नहीं हो सकता शीट में संशोधन
पहले मार्कशीट में गलती होने पर उसे अधिकारी पेन चलाकर ठीक कर दिया करते थे। अधिकारियों के हस्ताक्षर होने की वजह से काम बन जाया करता था, लेकिन दुर्ग विवि की मार्कशीट में यह संभव नहीं हो पाएगा।

विवि ने मार्कशीट को नॉनटेयरेबल पेपर (प्लास्टिक जैसी शीट) में प्रिंट कराया है, जिस पर कलम चलाने की गुंजाइश नहीं है। अब विवि को सभी मार्कशीट दोबारा से तैयार करनी होगी। पहले ही काफी विलंब से मार्कशीट विद्यार्थियों तक पहुंची है, अब इस गलती की वजह से नई शीट दोबारा बनाने में समय लगना तय है।

एजेंसी जिम्मेदार
रजिस्ट्रार दुर्ग विश्वविद्यालय ढडॉ. एसके त्रिपाठी ने बताया किएलएलबी की मार्कशीट में प्रिंटिंग की गलती है। इसलिए मार्कशीट वापस मांगी जा रही है। जल्द से जल्द उन्हें संशोधित शीट दे दी जाएगी। विवि को आर्थिक नुकसान नहीं होगा, क्योंकि शर्तों में है कि ऐसी गलती होने पर एजेंसी ही उसे ठीक करेगी।

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