नगरीय निकाय चुनावों में बागी होकर पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लडऩे वाले बागियों की अंतत: भाजपा में वापसी हो गई। जिला भाजपा के मुताबिक लोकल नेताओं की अनुशंसा पर प्रदेश नेतृत्व ने बागियों की पार्टी में सदस्यता बहाल कर दी है। ऐसे 25 बागियों के नाम भी जारी किए गए हैं। इससे पहले महीनेभर पहले ही इनमें से अधिकतर बागियों को पार्टी में वापसी के लिए प्रदेश प्रभारी ओम माथुर के सामने भी परेड कराई गई थी, लेकिन तब प्रदेश प्रभारी ने उन्हें बैरंग लौटा दिया था।
प्रदेश नेतृत्व के अनुमोदन पर पार्टी में वापसी करने वाले नेताओं में नगर निगम दुर्ग, अहिवारा नगर पालिका और धमधा, उतई, पाटन नगर पंचायत में वर्ष 2019 के नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी के विरुद्ध बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडऩे वाले शामिल हैं। बताया जाता है कि इनके निष्कासन के समाप्ति जिला भाजपा अध्यक्ष जितेंद्र वर्मा द्वारा लिखित अनुशंसा प्रदेश नेतृत्व को की गई थी। जिसके बाद प्रदेश अनुशासन समिति ने इस पर सहमति देते हुए अनुशंसा की थी। इस अनुशंसा पर प्रदेश नेतृत्व ने बागी भाजपा कार्यकर्ताओं का निष्कासन व निलंबन समाप्त कर उनकी पार्टी सदस्यता बहाल कर दी है।
इनकी हुई घर वापसी
श्वेता अग्रवाल धमधा, चंद्रिका भट्ट धमधा, नरेंद्र साहू उतई, भीमसेन सिन्हा उतई, सतीश चंद्राकर उतई, किरण देवांगन पाटन, नगर निगम दुर्ग से शिवेंद्र सिंह परिहार, मीना सिंह, कविता तांडी, श्याम शर्मा, ज्ञानेश्वर ताम्रकार, अमर भोई, रेखा लोढ़ा, पार्वती साहू, दिनेश मिश्रा, मोहनलाल केसवानी, वसीम कुरैशी, खिलावन मटियारा, रोशनी फत्ते साहू, ममता देवांगन, सविता पोषण साहू, दशरथ लाल पेंदरिया, अरुण कुमार सिंह, अनूप सोनी, पद्मावती देवांगन।
सक्रिय भूमिका की है अपेक्षा
इधर कार्यकर्ताओं की निष्कासन समाप्ति पर जिला अध्यक्ष जितेंद्र वर्मा का कहा कि बागियों को पुन: मुख्यधारा में शामिल किया गया है। इन कार्यकर्ताओं से अपेक्षा है कि पार्टी को मजबूती प्रदान करने में वे अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए महत्वपूर्ण योगदान देंगे। पार्टी के लिए तन-मन-धन से अपने अपने कार्य क्षेत्र में पूरी ऊर्जा लगाएंगे।
इधर नाराजगी की भी खबर
प्रदेश प्रभारी ओम माथुर के इंकार के बाद स्थानीय नेताओं द्वारा बागियों की घर वापसी कराए जाने को लेकर भी कुछ नेताओं की नाराजगी की खबर है। खासकर इनके कारण जिन नेताओं को पराजय का सामना करना पड़ा था। नाराज नेता इसे पार्टी अनुशासन से भी जोड़कर नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश प्रभारी के इंकार के बाद उनकी रजामंदी के बिना नेताओं की घर वापसी के गलत संदेश जाएगा। इसे पार्टी अनुशासन के विपरीत भी करार दिया जा रहा है।