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10वीं-12वीं रिजल्ट बिगड़ने का बड़ा कारण… 250 शिक्षकों के ट्रांसफर से पढ़ाई पर पड़ा असर, दुर्ग में बच्चों को लगा झटका

Teacher Transfer Impact: छत्तीसगढ़ के Durg जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में गिरावट के बाद शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी Arvind Mishra ने प्राचार्यों की बैठक लेकर समीक्षा की और कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा।

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Chhattisgarh Education News

Chhattisgarh Education News(photo-patrika)

Chhattisgarh Board Result: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के इस बार अपेक्षित परिणाम नहीं आने के बाद शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। खराब प्रदर्शन के कारणों की समीक्षा के लिए जिला शिक्षा अधिकारी अरविन्द मिश्रा ने प्राचार्यों की बैठक लेकर स्थिति का आकलन किया और कमजोर परिणाम देने वाले स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा। बैठक में शिक्षण व्यवस्था, पढ़ाई की गुणवत्ता और स्कूलों में संसाधनों की उपलब्धता पर भी चर्चा की गई, ताकि आगामी परीक्षाओं में बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

10th 12th Board Result: प्राचार्यों ने बताई वजह: समय की कमी और बदलाव का असर

बैठक के दौरान कई प्राचार्यों ने बताया कि उनकी नई पोस्टिंग परीक्षा सत्र के दौरान हुई, जिससे उन्हें स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था समझने और सुधारने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। उनका कहना है कि परीक्षा का माहौल पहले से ही तैयार था, ऐसे में पढ़ाई पर फोकस प्रभावित हुआ।

प्रमोशन और प्रशासनिक बदलाव बने बड़ी चुनौती

अधिकारियों के अनुसार इस बार परिणाम प्रभावित होने के पीछे कई प्रशासनिक कारण भी सामने आए हैं। Durg जिले में करीब 194 व्याख्याताओं को प्राचार्य पद पर पदोन्नति दी गई, जिनमें से अधिकांश पहले से ही स्कूलों में कार्यरत थे। हालांकि पदोन्नति प्रक्रिया सितंबर से ही चल रही थी, जिससे शिक्षकों पर मानसिक और प्रशासनिक दबाव बना रहा। इसके अलावा करीब 56 व्याख्याता युक्तियुक्तकरण (rationalisation) की प्रक्रिया में प्रभावित हुए, जिसके कारण कई स्कूलों से शिक्षकों का स्थानांतरण हो गया।

पढ़ाई पर पड़ा असर, शिक्षकों की कमी बनी कारण

लगभग 250 व्याख्याताओं के स्कूल छोड़ने या स्थानांतरण से कई विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हुई है। दुर्ग जिले में शिक्षकों की कमी के कारण नियमित कक्षाएं बाधित रहीं, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ा। कई विषयों की पढ़ाई समय पर पूरी नहीं हो सकी और परीक्षा की तैयारी भी प्रभावित हुई। इसके चलते स्कूलों में शैक्षणिक माहौल कमजोर होने की स्थिति बनी रही।

प्रशिक्षण और गैर-शैक्षणिक कार्यों का दबाव

शिक्षा विभाग की ओर से चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों और गैर-शैक्षणिक कार्यों ने भी शिक्षण व्यवस्था पर असर डाला। विशेष रूप से एसआईआर (SIR) जैसे कार्यों में शिक्षकों की व्यस्तता के कारण स्कूलों में नियमित पढ़ाई प्रभावित हुई। पूरे सत्र में चल रहे युक्तियुक्तकरण और प्रशासनिक गतिविधियों ने भी स्थिति को जटिल बना दिया।

शिक्षा व्यवस्था पर समीक्षा की जरूरत

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार प्रशासनिक बदलाव, शिक्षकों की कमी और गैर-शैक्षणिक कार्यों के बढ़ते दबाव का सीधा असर छात्रों के परिणामों पर पड़ा है। अब विभाग को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए स्थायी और संतुलित नीति अपनाने की जरूरत बताई जा रही है।