
दुर्ग. नगर निगम कार्यालय में सोमवार की देर शाम स्थापना शाखा के बाबूओं ने चोरी-छिपे दर्जनों फाइलें जलाकर खाक कर दी। कार्यालयीन समय के बाद सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की गैर मौजूदगी में इस तरह फाइलों के जलाए जाने से समूचा निगम प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है। माना जा रहा है कि सामग्रियों की खरीदी और स्टोर से जुड़े किसी घालमेल को नष्ट करने के इरादे से इसे अंजाम दिया गया है। अधिकतर फाइलें दो साल की भीतर की बताई जा रही है।
पत्रिका को जल्दबाजी में जलाए जाने के कारण इन फाइलों के बचे हुए पन्नों के अवशेष मिले हैं। इससे प्रमाणित होता है कि फाइलें बहुत पुराने व गैर जरूरी (डिस्पोज करने योग्य) नहीं थे। पत्रिका पास उपलब्ध अवशेष में मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय वार्ड 54 पोटिया में 50 हजार से फर्नीचर व जरूरी सामान खरीदने संबंधी फाइल के अवशेष हैं। इस फाइल में 12 व 13 फरवरी 2020 की तिथि के साथ ईई मोहनपुरी गोस्वामी और तात्कालीन कमिश्नर इंद्रजीत बर्मन के हस्ताक्षर है। इसी तरह एक अन्य फाइल के अवशेष में विद्युत विभाग में आलमारी खरीदी की स्वीकृति का जिक्र है। इस फाइल में भी 15 जुलाई 2020 को स्वीकृति के साथ तात्कालीन कमिश्नर इंद्रजीत बर्मन के हस्ताक्षर हैं।
दूसरे बाबू ने छीनकर बचाई अपनी फाइलें
बताया जाता है कि जिस समय स्थापना शाखा के बाबू निगम कार्यालय के मंदिर के पीछे फाइलें जला रहे थे उस समय समीप के दूसरे विभाग के बाबू अपने कक्ष में बैठे थे। वे कक्ष से बाहर निकले तो फाइलें जलाई जा रही थी। इस दौरान उन्हें भी अपने शाखा से संबंधित फाइलें दिखी। सूत्रों की मानें तो उक्त बाबू ने अपनी फाइल छीनकर जलने से बचाई। इसके बाद स्थापना शाखा के बाबू चुपचाप निकल गए।
बड़ा सवाल - चोरी-छिपे क्यों जलाई फाइलें
आला अफसरों के बिना जानकारी, चोरी-छिपे व कार्यालय के समय के बाद शाम 6 बजे इस तरह फाइलें जलाए जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। फाइलें यदि डिस्पोज करने लायक थी तो आला अफसरों की विधिवत मंजूरी लेकर डिस्पोज किया जाता। यह कार्य जिम्मेदार अफसर की मौजूदगी में किया जाता। ऐसे में माना जा रहा है कि ये फाइलें किसी न किसी घालमेल अथवा गड़बड़ी के प्रमाण रहे होंगे।
रिटायर्ड बाबू भी छान रहे निगम की फाइलें
निगम सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कई रिटायर्ड बाबू व पुराने कर्मचारी आज भी निगम कार्यालय में जाकर फाइलों का निपटान कर रहे हैं। इन बाबूओं पर सेवा के दौरान कई आरोप भी लगते रहे हैं। रिटायर्ड बाबूओं की निगम कार्यालय में दखल को भी फाइलों के जलाए जाने से जोड़कर देखा जा रहा है।
गायब हो चुकी है दो सैकड़ा से ज्यादा फाइलें
निगम कार्यालय में जरूरी फाइलें गायब होने की शिकायत आम रही है। सूत्रों की मानें तो करीब दो सैकड़ा से ज्यादा फाइलें निगम कार्यालय से गायब हो चुकी है। इनमें कई घपले घोटालों से जुड़ी फाइलें भी है। पूर्व में तात्कालिन कमिश्नर जनकप्रसाद पाठक ने सख्ती करते हुए कुछ फाइलें ढूंढवाई भी थी, जिनमें कई भ्रष्टाचार के मामले उजागर हुए थे। कमिश्नर नगर निगम दुर्ग हरेश मंडावी ने बताया कि फाइलों के डिस्पोज से संबंधित नियम है, लेकिन बिना अनुमति कोई भी फाइल नहीं जलाई अथवा डिस्पोज की जा सकती है। ऐसे किसी मामले की अभी मुझे जानकारी नहीं है। ऐसा है तो यह बेहद गंभीर है। इसकी गंभीरता से पड़ताल कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।