एसआइटी तपन सरकार के इशारे पर अपराधिक गतिविधियों के साथ ही जमीन के बड़े सौदों में उसके दखल और वसूली के धंधे की शिकायतों की जांच करेगी।
दुर्ग. गैंगस्टर तपन सरकार के जेल से फैलाए गए अवैध कारोबार से लेकर उसको अपराध की दुनिया में जमे रहने में सहयोग करने वाले पुलिस और जेल अधिकारियों के नेटवर्क का खुलासा करने की तैयारी हो गई है। दुर्ग रेंज आइजी जीपी सिंह ने इस मामले में विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया है।
शिकायतों की जांच करेगी
इसमें पुलिस, क्राइम ब्रांच और आइटी सेल के अधिकारियों को रखा गया है। एसआइटी तपन सरकार के इशारे पर अपराधिक गतिविधियों के साथ ही जमीन के बड़े सौदों में उसके दखल और वसूली के धंधे की शिकायतों की जांच करेगी।
इस बात का खुलासा पुलिस की प्राथमिक जांच में हुआ है। गैंगस्टर तपन की मर्जी के बिना पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी जेल में नहीं घुस पाते। यही वजह है कि जब भी जेल में दबिश दी जाती है जांच टीम खाली हाथ लौटती। जेल में गैंगस्टर का साम्राज्य चलने की पुलिस अधिकारियों को पहले ही सूचना मिलती रही है।
एएसपी और एसडीएम खड़े रहे जेल के बाहर
इस दौरान पुख्ता जानकारी मिलने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह और एसडीएम कैलाश वर्मा ने जनवरी 2018 को अलसुबह जेल में दबिश देने का प्लान बनाया। दोनों अफसर अपनी टीम के साथ जेल पहुंच गए, लेकिन वहां जेल मैनुअल का हवाला देकर आधा घंटे से ज्यादा दोनों को बाहर ही रोके रखा गया। चर्चा थी कि जेल में गड़बड़ी को उजागर करने वाले सारे सबूत हटा दिए गए, इसके बाद अधिकारियों को अंदर जाने दिया गया।
एसआइटी का गठन किया
दुर्ग आइजी जीपी सिंह ने बताया कि शिकायतों की सूची लंबी है। हम हर शिकायतों की जांच सूक्ष्मता से कर रहे हैं। जमीन संबंधी शिकायतों के लिए विशेष रूप से एसआइटी का गठन किया है। जांच अभी प्रारंभिक स्तर पर है। हर पहलू पर जांच की जा रही है।
खाली हाथ पड़ा था लौटना
एसडीएम कैलाश वर्मा ने बताया कि जनवरी २०१८ में एएसपी शहर की टीम ने जेल में दबिश दी थी। मैं भी उस टीम में शामिल था। हम अलसुबह जेल पहुंच गए थे। जांच के बाद हमें वहां कुछ भी नहीं मिला। खाली हाथ वापस लौटना पड़ा था।