सुनवाई के दौरान मां की हत्या से व्यथित अविवाहित बेटा व बेटी पिता के खिलाफ गवाही देने न्यायालय पहुंचे। उन्होंने न्यायालय को बताया कि लक्ष्मण साहू मजदूरी करने के बाद घर खर्च के लिए रुपए नहीं देता था। (Durg News)
दुर्ग. कुदाली के बेठ से पत्नी की हत्या (Murder in Durg) करने वाले ग्राम अमलीडीह निवासी लक्ष्मण साहू को न्यायालय (Durg District court) ने दोष साबित होने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश डॉ. ममता शुक्ला ने गवाहों के बयान और परस्थिजन्य साक्ष्य को आधार पर लक्ष्मण साहू को दोषी ठहराया। उस पर 2000 रुपए जुर्माना भी किया।
अम्लेश्वर थाना के ग्राम अमलीडीह निवासी लक्ष्मण साहू 7 जून 2018 को पत्नी गौरी बाई की हत्या कर सरपंच के घर पहुंचा था। उसने सरपंच पति कामदेव कोसले से कहा कि उसे पुलिस के हवाले कर जेल भेज दे। कारण पूछने पर उसने बताया कि वह कु दाली के बेठ से गौरी की पिटाई कर दी है। वह जमीन पर पड़ी है।
वह यह भी नहीं जानता कि गौरी जिंदा है या मर गई। लक्ष्ण की इस बात को सुन जब कामदेव घटना स्थल पहुंचा तो कमरे में गौरी की लाश पड़ी थी। दिवार और कमरे के फर्श पर खून के छिंटे थे। कामदेव की सूचना पर घटना स्थल पहुंची पुलिस ने शव को बरामद किया और लक्ष्मण को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
काम से लौटी गौरी तो किया विवाद
पुलिस (Durg Police) की जांच में यह बात सामने आई कि लक्ष्मण पत्नी के चरित्र पर संदेह करता था। इसी वजह से दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। घटना के दिन लक्ष्मण मजदूरी करने नहीं गया। वह गौरी की हत्या करने की योजनाबद्ध तरीके से इंतजार कर रहा था। सुबह 11 बजे जैसे ही गौरी काम से घर लौटी तो लक्ष्मण विवाद करने लगा और आवेश में आकर उस पर वार कर दिया।
नाना के पास रह रहे हंै बच्चे
मृतक गौरी साहू के 1 पुत्र व 3 बेटी है। गौरी मजदूरी कर जैसे तैसे दो बेटियों की शादी कर चुकी थी। वहीं एक बेटा व बेटी अविवाहित है। मां की हत्या होने और पिता के जेल जाने के बाद दोनों नाना नानी के घर रहने चले गए।
बेटी और बेटे ने कहा-मां मजदूरी कर चलाती थी घर
सुनवाई के दौरान मां की हत्या से व्यथित अविवाहित बेटा व बेटी पिता के खिलाफ गवाही देने न्यायालय पहुंचे। उन्होंने न्यायालय को बताया कि लक्ष्मण साहू मजदूरी करने के बाद घर खर्च के लिए रुपए नहीं देता था। मृतक मां मजूदरी कर घर चलाती थी। इसके बाद भी आए दिन पिता उसके साथ विवाद करता था। हत्या की वारदात के छह माह पहले लक्ष्मण ने पत्नी की पिटाई की थी, तब परिवार के सदस्यों ने पारिवारिक विवाद की बात कहते हुए समझाइश दी और पुलिस को सूचना नहीं देने का निर्णय लिया था। इसके बाद भी पिता पर समझाइश का असर नहीं हुआ।
अतिरिक्त लोक अभियोजक महेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि घटना के बाद लक्ष्मण ने ही हत्या की बात सार्वजनिक की। जिस बेठ से उसने अपनी पत्नी की पिटाई की थी उसे पुलिस ने उसके ही निशानदेही पर जब्त किया था। सुनवाई के दौरान दो बच्चों के बयान और मौजूद साक्ष्य को न्यायाधीश ने सजा के लिए आधार बनाया और फैसला सुनाया।