रिटायर बीएसपी कर्मचारी का मेडिक्लेम दावा निरस्त करने पर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी न्यू दिल्ली को जिला उपभोक्ता फोरम ने दोषी ठहराया।
दुर्ग. भिलाई इस्पात संयंत्र के सेवानिवृत्त कर्मचारी का मेडिक्लेम दावा निरस्त करने पर सीनियर मैनेजर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी न्यू दिल्ली को जिला उपभोक्ता फोरम ने दोषी ठहराया। उस पर 78735 रुपए हर्जाना लगाया। बीमा कंपनी को यह राशि एक माह के भीतर जमा करनी होगी। इस राशि में क्लेम राशि 48735 रुपए, मानसिक कष्ट के लिए 20 हजार और वाद व्यय 10 हजार शामिल है। सेक्टर-वन भिलाई निवासी आशा चाटे के परिवाद पर यह फैसला फोरम की अध्यक्ष मैत्रेयी माथुर, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने सुनाया।
स्कीम के तहत मेडिक्लेम पालिसी ली थी
परिवाद के मुताबिक आवेदिका बीएसपी की सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उसने स्कीम के तहत मेडिक्लेम पालिसी ली थी और 7144 रुपए प्रीमियम जमा किया था। एक वर्ष की पालिसी के बीच में ही वह अपना इलाज क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज हॅास्पिटल वेल्लूर में कराया था। जहां पर उसने 48735 रुपए का भुगतान किया। उन्होंने समस्त दस्तावेज के साथ इलाज में खर्च की गई राशि को लेने के लिए क्लेम किया था। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए उनका परिवाद खारिज कर दिया कि आवेदन निर्धारित समय अवधि में जमा नहीं किया गया।
इन्हे किया दोषमुक्त
इस प्रकरण में परिवादी ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उपक्रम बीएसपी के मैनेजर ऑपरेशन, एमडी इंडिया हेल्थ इश्योरेंस पुणे व मैनेजर इंचार्ज एमडी इंडिया हेल्थ इश्योरेंश्स पुणे को भी उत्तरवादी बनाया था। जिला उपभोक्ता फोरम ने केवल बीमा कंपनी को ही दोषी ठहराया।
चेक बाउंस के मामले में डॉ. खंडूजा पर आरोप तय
अपोलो बीएसआर अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. एमके खण्डूजा पर मंगलवार न्यायालय में आरोप तय किया गया। उनके खिलाफ चेक बाउंस का परिवाद प्रस्तुत किया गया है। प्रकरण न्यायाधीश स्वर्णलता राजमणी के न्यायालय में विचाराधीन है। परिवाद भिलाई के रमेश व रौनक कोठारी ने प्रस्तुत किया है।
अस्पताल बनाते समय डॉ. खण्डूजा ने 10-10 लाख की मदद ली थी
प्रकरण के मुताबिक रमेश व रौनक कोठारी ने जानकारी दी है कि डॉ. खण्डूजा से उनकी पुरानी जान पहचान है। अस्पताल बनाते समय डॉ. खण्डूजा ने १०-१० लाख रुपए की मदद ली थी। रुपए की मांग करने पर उन्हें चेक दिया था। चेक को भुगतान के लिए जमा करने पर बैंक ने यह कहते हुए बाउंस कर दिया कि चेक जारीकर्ता के खाते में पर्याप्त राशि नहीं है।