दुर्ग

बालोद-बस्तर में हुई बारिश ट्विनसिटी के लिए वरदान, तांदुला में जल भराव तीन साल में सबसे अच्छी स्थिति

जल संकट का खतरा झेल रहे जिले के लिए राहत भरी खबर है। पिछले सप्ताहभर में हुई बारिश ने इस खतरे को काफी हद तक टाल दिया है।

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Aug 18, 2018
बालोद-बस्तर में हुई बारिश ट्विनसिटी के लिए वरदान, तांदुला में जल भराव तीन साल में सबसे अच्छी स्थिति

दुर्ग. जल संकट का खतरा झेल रहे जिले के लिए राहत भरी खबर है। पिछले सप्ताहभर में हुई बारिश ने इस खतरे को काफी हद तक टाल दिया है। बारिश के कारण पिछले 10 दिन में तांदुला जलाशय में 2916 एमसीएफटी से ज्यादा जल भराव हुआ है। इससे पहले तांदुला में महज 34.50 फीसदी यानि ३६८२.५३ एमसीएफटी पानी था, यह अब बढ़कर ५९.01 यानि ६२९८.७२ एमसीएफटी पहुंच गया है। यह पिछले तीन साल में 18 अगस्त की स्थिति में जलभराव के लिहाज से सबसे बेहतर स्थिति है। वहीं खरखरा में भी करीब 15 फीसदी जलभराव हुआ है।

कैचमेंट से जलाशयों में लगातार पानी पहुंच रहा
खरखरा और तांदुला जलाशय से जिले की पानी की जरूरत पूरी होती है। खरखरा से दुर्ग-भिलाई की प्यास बुझती है, वहीं तांदुला के पानी से ग्रामीण क्षेत्र का निस्तारी होती है, लेकिन मानसून सीजन में अब तक तेज बारिश नहीं होने के कारण जलाशयों में पर्याप्त जलभराव नहीं हो रहा था। इससे चिंता की स्थिति बन गई थी, लेकिन अब जलाशयों में पर्याप्त जल भराव हो रहा है। अफसरों के मुताबिक दोनों जलाशयों के कैचमेंट में पिछले 10 दिन से लगातार बारिश हो रही है। इसके चलते कैचमेंट से जलाशयों में लगातार पानी पहुंच रहा है।

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बालोद-बस्तर में बारिश बना वरदान
जिले की प्यास बुझाने वाले जलाशयों के लिए इस बार बालोद व बस्तर में अच्छी बारिश वरदान साबित हुआ। जिले में खंडवर्षा के कारण नदी-नालों में बहाव नहीं बन रहा था, लेकिन इस बीच बस्तर और बालोद में जमकर बारिश हुई। बालोद के डौंडीलोहारा से लेकर बस्तर में कांकेर तक का इलाका इन दोनों जलाशयों का कैचमेंट है।

2014 में छलक गए थे जलाशय
वर्ष 2014 में अगस्त की शुरुआत में जमकर बारिश हुर्ई थी। इससे सभी जलाशय छलक गए थे। स्थिति यह थी कि जलाशयों से पानी तक छोडऩा पड़ा था। इस कारण अगस्त में ही शिवनाथ उफान पर पहुंच गया था। वहीं वर्ष 2015 में भी जलाशयों में इस अवधि तक आधा से ज्यादा पानी भर गया था।

इसलिए कह रहे पानी की चिंता दूर
निस्तारी व पेयजल के लिए कम से कम 30 फीसदी पानी की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा करीब 10 फीसदी वाष्पीकरण में खर्च हो जाता है। ऐसे में आपात स्थिति के लिएकम से कम 40 फीसदी पानी होना जरूरी है। अच्छी बात यह है कि दोनों जलाशयों में इससे ज्यादा जलभराव हो चुका है, वहीं कैचमेंट से लगातार पानी पहुंच रहा है। इस तरह समझे तीन साल में जलभराव की स्थिति को (18 अगस्त की स्थिति में)

पानी की मात्रा प्रतिशत में
जलाशय - वर्ष 2016 - वर्ष 2017 - इस बार
तांदुला - 41.06 - 24.6 2 - 59.01
खरखरा - 6 8 .78 - 38 .30 - 46 .40
खपरी - 99.49 - 22.10 - 79.98
गोंदली - 30.25 - 41.8 5 - 54.95
बारिशसे पहले और अब जलभराव

तांदुला
कुल क्षमता - 106 74 मि. घनफुट
8 अगस्त को - ३६८२.५३ मि. घनफुट
18 अगस्त को - ६२९८.७२ मि. घनफुट

खपरी
क्षमता - ४१३ मि. घनफुट
8 अगस्त को - ४९.५६ मि. घनफुट
18 अगस्त को - ३३०.३१ मि. घनफुट

गोंदली
कुल क्षमता -३४१० मि. घनफुट
8 अगस्त को - १५३४.५० मि. घनफुट
18 अगस्त को - १८७२.४३ मि. घनफुट

खरखरा
भराव क्षमता - ५००० मि. घनफुट
8 अगस्त को - १५६१.५० मि. घनफुट
18 अगस्त को - २३२०.०० मि. घनफुट
जिले में अब तक वर्षा की स्थिति

ब्लॉक - अब तक - औसत (मिमी में)
दुर्ग - 6 77.7 - 735.2
धमधा - 378 .9 - 6 04.9
पाटन - 6 90.0 - 6 97.7
औसत - 58 2.2 - 6 79.3

एक दो दौर की अच्छी बारिश से पानी की चिंता खत्म
जल संसाधन संभाग के ईई बीजी तिवारी जलाशयों में पानी का अच्छा भराव हो रहा हैं। ऊपरी क्षेत्र से लगातार अच्छी बारिश हो रही है।इस कारण नदी नालों से जलाशयों में पर्याप्त पानी पहुंच रहा है। एक दो दौर की अच्छी बारिश से पानी की चिंता खत्म हो जाएगी।

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Published on:
18 Aug 2018 11:05 pm
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