मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने बुधवार को पूरे विश्वास के साथ कहा कि आने वोल एक या दो साल में 28 फिसदी का टैक्स स्लैब पूरी तरह से खत्म हो सकता है।
नई दिल्ली। बहुत जल्द ही अपना कार्यकाल समाप्त करने वाले मुख्य आर्थिक सलाहकारअरविंद सुब्रमण्यम ने बुधवार को पूरे विश्वास के साथ कहा कि आने वोल एक या दो साल में 28 फिसदी का टैक्स स्लैब पूरी तरह से खत्म हो सकता है। सभी राज्यों के वित्त मंत्री और यूनियर वित्त मंत्री के समूह वाला जीएसटी काउंसिल ने 28 फीसदी टैक्स स्लैब में आने वाले कई वस्तुओं को कम किया है। जीएसटी काउंसिल ने कुल 191 वस्तुओं को 28 फीसदी टैक्स स्लैब से बाहर किया है। इसमें एसी, टीवी, वीडियो रिकाॅर्डर, डिश वाॅशिंग मशीन और आॅटोमोबाइल जैसे वस्तुएं शामिल हैं।
28 फीसदी टैक्स स्लैब में केवल 35 वस्तुएं
मौजूदा समय में इस टैक्स स्लैब में केवल 35 वस्तुएं ही हैं। पिछले साल 1 जुलाई को जीएसटी लागू होने के समय 28 फीसदी टैक्स स्लैब में कई वस्तुओं को रखने पर सरकार विपक्षी दलों द्वारा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। राज्यसभा टीवी को दिए एक इंटरव्यू में अरविंद सुब्रमण्यम ने बताया कि जीएसटी काउंसिल ने इस स्लैब से कई उत्पादों को दूसरे टैक्स स्लैब में किया है। उन्होंने कहा कि, मैं पूरी विश्वास के साथ ये कह सकता हूं कि आने वाले एक से दो सालों में 28 फीसदी का टैक्स स्लैब पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
कर्इ कड़े सवालों के दिए जवाब
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने बताया कि लघु एवं मध्यम उद्योगों पर जीएसटी का बोझ कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सरकार में लेटरल प्रवेश को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि, मैं खुद एक लेटरल प्रवेशकर्ता हूं, ऐसे में मैं कैसे इसके विपरित अपनी बात रख सकता हूं। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर तरह के टैलेंट को मौका दिया जाना चाहिए, फिर चाहें वो सरकार के बाहर को हो या देश के बाहर का हो। आपको कुछ खास तरह की विशेषज्ञता की जरूरत होती है।
30 जुलार्इ को होने वाले रिटायर
ऐसे में मेरा मानना है कि लेटरल प्रवेश एक अच्छी बात है। सरकार को सिलीकाॅन वैली से भी अधिक टैलेंट की जरूरत है। बात दें कि आगामी 30 जुलाई को अरविंद सुब्रमण्यम भारत के मुख आर्थिक सलाहकार के पद से मुक्त हो जाएंगे। वो मंत्रालय से अक्टूबर 2014 से जुड़ें हैं। सुब्रमण्यम ने आगे बताया कि मंत्रालय और सरकार में अपने सभी सहकर्मियों के साथ करना उनके लिए बेहद अच्छा रहा। जब उनसे ये पूछा गया कि अपने पद से मुक्त होने के बाद वो क्या करेंगे तो उन्होंने बातया कि वो हार्वर्ड विश्वविद्यालय जाएंगे। वहां वो रिसर्च और लेखन पर अपना सारा ध्यान केंद्रित करेंगे।