
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक। फोटो: पत्रिका
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार फरवरी महीने में भारत में खुदरा महंगाई थोड़ी बढ़कर 3.21 फीसदी हो गई। इसका मुख्य कारण खाने-पीने की चीजों, कपड़ों, घर के किराए और बिजली-पानी जैसी उपयोगिता सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी है। जनवरी में खुदरा महंगाई 2.75 फीसदी थी, इसलिए फरवरी में इसमें हल्की बढ़ोतरी देखी गई।
हालांकि नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों की सीधे पिछले साल से तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि जनवरी में महंगाई मापने के लिए इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की सूची (इंडेक्स बास्केट) को बदल दिया गया है। जनवरी से महंगाई के आंकड़े नए आधार वर्ष 2024 के अनुसार जारी किए जा रहे हैं। नई इंडेक्स बास्केट के तहत जनवरी में खाद्य महंगाई 2.13 फीसदी दर्ज की गई थी।
पिछले सात महीनों में से छह में CPI आधारित महंगाई RBI के 2 से 6 फीसदी के लक्ष्य से नीचे रही। इसके बावजूद RBI की दर निर्धारण कमेटी ने अपनी पिछली बैठक में प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और व्यवधानों के चलते तेल, गैस, खाद्य वस्तुओं और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें प्रभावित हो रही हैं, इसलिए अप्रैल की शुरुआत में होने वाली अगली मौद्रिक नीति बैठक में भी ब्याज दरें स्थिर रहने की संभावना है।
CPI में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी बड़ी होने के कारण खाद्य कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव सीधे महंगाई को प्रभावित करता है। जून 2025 से खाद्य महंगाई नकारात्मक रही, यानी कीमतें एक साल पहले की तुलना में लगातार कम रहीं। इसी वजह से अक्टूबर 2025 में CPI महंगाई अपने अब तक के निम्न स्तर 0.25 फीसदी तक पहुंच गई थी, जबकि खाद्य महंगाई नकारात्मक रूप से 5.02 फीसदी के रिकॉर्ड निम्न पर थी।
नई CPI श्रृंखला 2023-24 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें खाद्य एवं पेय पदार्थों का भार पुरानी श्रृंखला के 45.86 फीसदी से घटाकर 36.75 फीसदी कर दिया गया है। इसके साथ ही कोर यानी मूल वस्तुओं की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत अंक बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खाद्य कीमतों का महंगाई पर प्रभाव कम होगा और समग्र महंगाई कम अस्थिर रहेगी।
सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि यदि CPI में उतार-चढ़ाव घटता है तो महंगाई भत्ते और महंगाई-सूचकांक आधारित बॉन्ड जैसे वित्तीय व्यय भी अधिक स्थिर और अनुमानित हो जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि नई इंडेक्स बास्केट में ग्रामीण क्षेत्रों में किराए का मापन शामिल किया गया है और सैंपलिंग कवरेज बेहतर की गई है, जिससे आवास लागत का देशभर में अधिक सटीक आकलन संभव होगा।
Updated on:
12 Mar 2026 05:56 pm
Published on:
12 Mar 2026 05:56 pm
