
नई दिल्ली। अभी तक देश में जितने भी उपचुनाव हुए हैं, आैर जितनों में भाजपा की हार हुर्इ है उनमें से सबसे ज्यादा किरकरी भाजपा की कैराना में हुर्इ है। इसका बहुत बड़ा कारण है पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों का नाराज होना। हैरानी की बात तो ये है कि भाजपा के उम्मीदवार को उस पार्टी के कैंडीडेट ने हराया जो 2014 चुनावों के चुनावों के बाद खत्म हो गर्इ थी। साथ ही वेस्ट यूपी के किसानों ने उसे हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया था। अब भाजपा आैर केंद्र सरकार ने इस हार से सबक लेते हुए किसानों को राहत दे दी है। वेस्ट यूपी के गन्ना किसानों के बकाए भुगतान के लिए 8000 करोड़ रुपए पैकेज को दे दी है।
8 हजार करोड़ रुपए का राहत पैकेज
गन्ना किसानों को राहत देने तथा उनके बकाया भुगतान के लिए केंद्र सरकार 8,000 करोड़ से ज्यादा का व्यापक पैकेज दे दिया है। मोदी कैबिनेट ने इसके लिए हरी झंडी दिखार्इ है। गन्ना किसानों का बकाया 20,000 रुपए से ज्यादा हो गया है। जानकारों की मानें तो सरकार की आेर से गन्ना किसानों के लिए यह बड़ी राहत है।
सीधा खातों में आएगा रुपया
इस पैकेज में 30 लाख मीट्रिक टन गन्ने के भंडारण किया जाएगा, जिससे रुपया सीधे गन्ना किसानों के खातों में हस्तांतरित हो। ऐसे भंडारण की सुविधा होने से गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान होगा तथा मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाने से चीनी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।" उन्होंने कहा कि भंडारण के निर्माण की कुल अनुमानित कीमत 1,200 करोड़ रुपए है।
बढ़ार्इ जाएगी एथनॉल की क्षमता
उन्होंने कहा, "पैकेज में देश में एथनॉल की क्षमता बढ़ाने की 4,500 करोड़ रुपए से ज्यादा की महत्वपूर्ण योजना है। इथनॉल के खरीद मूल्य में 6 से 7 रुपए की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी गई है, जो अभी 40.85 रुपए प्रति लीटर है ताकि चीनी मिलें जल्द से जल्द गन्ना किसानों को पेमेंट कर सकें।
भाकियू का आरोप
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि बेल आउट पैकेज गन्ना किसानों की समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। पूर्व में भी इस तरह के पैकेज दिए जाते रहे हैं। यूपीए सरकार द्वारा 6000 करोड़ रुपए व राजग द्वारा भी 1500 करोड़ रुपए का पैकेज दिया गया था, लेकिन किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। यह चुनावी शिगूफा है।
चीनी की यह होंगी कीमतें
सरकार चीनी का एक्स मिल प्राइज कम से कम 29 रुपए तय कर दिया है। हर मिल के लिए मासिक रिलीज कोटा भी तय किया जा सकता है। अभी चीनी का औसत एक्स मिल प्राइज 25.60 रुपए से लेकर 26.22 रुपए है, जो कि लागत से भी कम है। चीनी के बंपर उत्पादन को देखते हुए सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी को 100 फीसदी और एक्सपोर्ट ड्यूटी को पूरी तरह से खत्म कर दिया था। सरकार ने चीनी मिलों से करीब 20 लाख टन चीनी का निर्यात करने को भी कहा था।