
कम तौल का खेल भी तेज
ग्वालियर. त्योहारी सीजन में मिठास और खरीदारी के बीच मिलावट और कम तौल का खेल भी तेज होता नजर आ रहा है। दानाओली निवासी सतीश शर्मा ने किराना दुकान से 250 ग्राम बादाम का पैकेट खरीदा। घर पहुंचकर पैकेट खोला तो दावा 250 ग्राम का था, लेकिन बादाम महज 168 ग्राम निकले। यानी घोषित वजन से 82 ग्राम कम सामग्री थी। पैकेट को तौलने पर उसका रैपर करीब 12 ग्राम और अंदर रखी नमीरोधी पुड़िया का वजन करीब 70 ग्राम निकला। यानी पैकेट के वजन में बड़ी मात्रा ऐसी सामग्री की थी, जो खाने योग्य नहीं थी। हैरानी की बात यह भी रही कि पैकेट पर एमआरपी और निर्माण तारीख दर्ज नहीं थी। सिर्फ छह महीने में उपयोग करने की जानकारी लिखी थी। सतीश पैकेट लेकर दुकानदार के पास पहुंचे और उसे वापस कर दिया। सवाल यह है कि अगर एक ग्राहक की नजर इस गड़बड़ी पर पड़ गई तो ऐसे कितने पैकेट बाजार में बिक चुके होंगे?
जागरूकता की कमी, कारोबारियों को फायदा…
ग्राहक अक्सर कीमत, स्वाद और दिखावे पर ध्यान देता हैं पैकेट की जरूरी जानकारियां नहीं जांचते, जिसका फायदा कारोबारी उठाते हैं। त्योहारी सीजन में लापरवाही जेब और सेहत पर भारी पड़ सकती है।
सिर्फ बादाम नहीं, पैकेटों पर भी बड़ा खेल
शहर की किराना, मिठाई और बेकरी दुकानों पर पैक्ड नमकीन, बिस्किट, ड्रायफ्रूट्स और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री में भी नियमों की अनदेखी के मामले सामने आ रहे हैं। कई उत्पाद सादे पैकेटों में ग्राहकों को दिए जा रहे हैं। इन पर न एमआरपी, न निर्माण तिथि, न उपयोग की अंतिम तिथि और न निर्माता की पूरी जानकारी होती है।
निगरानी कमजोर
-नापतौल विभाग के अनुसार पैक्ड खाद्य सामग्री पर शुद्ध वजन, एमआरपी, पैकिंग तारीख और निर्माता/विक्रेता का नाम-पता जैसी जानकारी होना जरूरी है।
-घोषित मात्रा से कम वजन मिलने पर पहली बार 10 हजार से एक लाख रुपए तक जुर्माना, दूसरी बार पांच लाख और तीसरी या बाद की बार 50 -लाख रुपए तक जुर्माना, जेल या दोनों का प्रावधान है।
ग्वालियर जैसे बड़े शहर में जांच के लिए विभाग के पास सिर्फ एक निरीक्षक होना निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
नापतौल विभाग के उप-नियंत्रक राजेश पिल्लई का कहना है कि सीमित स्टाफ के बावजूद समय-समय पर जांच की जाती है। त्योहारी सीजन को देखते हुए जांच-पड़ताल शुरू की जा रही है।
Updated on:
29 Aug 2026 06:08 pm
Published on:
29 Aug 2026 06:04 pm
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