
सरकारी कार्यालयों, संस्थानों और अन्य शासकीय भवनों में बिजली की खपत लगातार बनी रहती है। ऐसे में छतों पर सोलर पैनल लगाए जाने से बिजली की जरूरत का एक हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में रेस्को मोड पर सोलर रूफटॉप लगाने की तैयारी, बिजली खर्च घटाने पर जोर
ग्वालियर. सरकारी भवनों की खाली छतों का इस्तेमाल अब बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत जिले में स्थित शासकीय भवनों की छतों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इन संयंत्रों की स्थापना रेस्को मोड में की जाएगी। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग ने इस संबंध में संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की ओर से जारी अद्र्ध शासकीय पत्र के माध्यम से शासकीय भवनों पर सौर रूफटॉप संयंत्रों की स्थापना के लिए नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। पत्र के साथ योजना से संबंधित दिशा-निर्देश भी भेजे गए हैं। अब जिले के विभिन्न सरकारी भवनों को सोलर रूफटॉप के लिए चिह्नित कर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, अस्पतालों, संस्थानों और अन्य शासकीय भवनों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बिजली की खपत होती है। इन भवनों की छतों पर सौर संयंत्र स्थापित होने के बाद बिजली की जरूरत का एक हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा। इससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी और सरकारी संस्थानों के बिजली बिल में भी कमी आने की उम्मीद है। सौर ऊर्जा के उपयोग से सरकारी भवनों को स्वच्छ और हरित ऊर्जा से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे एक ओर बिजली खर्च कम करने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा मिलने से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी फायदा होगा।
सौर रूफटॉप संयंत्रों की स्थापना के लिए रेस्को यानी Renewable Energy Service Company (RESCO) मॉडल अपनाया जाएगा। इस व्यवस्था में अधिकृत एजेंसी सौर संयंत्र की स्थापना और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे शासकीय विभागों को संयंत्र स्थापित करने के लिए शुरुआती स्तर पर बड़ी पूंजी लगाने का दबाव कम हो सकता है। रेस्को मॉडल के तहत संयंत्र की स्थापना, संचालन और रखरखाव जैसी जिम्मेदारियां अधिकृत एजेंसी के माध्यम से की जा सकती हैं। उत्पादित सौर ऊर्जा का उपयोग संबंधित शासकीय भवन में किया जाएगा। हालांकि इसकी पूरी प्रक्रिया योजना में निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होगी।
जिले के सरकारी भवनों को सोलर रूफटॉप के लिए चिह्नित करते समय उनकी छत का क्षेत्रफल, बिजली की खपत और सौर संयंत्र स्थापित करने की तकनीकी क्षमता को देखा जाएगा। इसके आधार पर अलग-अलग भवनों पर सोलर प्लांट की क्षमता निर्धारित की जा सकती है।
सरकारी भवनों की बड़ी संख्या में उपलब्ध खाली छतों का इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए होने से सरकारी परिसरों को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम माना जा रहा है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले समय में बिजली खर्च में बचत के साथ सरकारी संस्थानों में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ सकता है।
सरकारी भवनों की छतें अब सिर्फ छाया नहीं देंगी, बिजली भी बनाएंगी। ग्वालियर जिले में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। काम रेस्को मॉडल पर होगा, जिससे सरकारी विभागों पर शुरुआती निवेश का दबाव कम हो सकता है। लक्ष्य है बिजली खर्च घटाना, खाली छतों का उपयोग करना और सरकारी परिसरों को हरित ऊर्जा से जोड़ना।
Updated on:
28 Aug 2026 09:39 pm
Published on:
28 Aug 2026 09:39 pm
