
ममता लोईवाल ने अपना लीवर भाई ईश्वर को डोनेट कर दिया।
ग्वालियर. चार बहनों के इकलौते छोटे भाई की जिंदगी जब लीवर फेल होने से सांसों पर अटकी, तो जिस बहन को घर वाले कमजोर समझकर टेस्ट तक नहीं करवा रहे थे, उसी ने अपना कलेजा निकालकर भाई की झोली में डाल दिया। रक्षाबंधन पर अक्सर बहनें भाई की लंबी उम्र मांगती हैं, ग्वालियर की ममता लोईवाल ने तो भाई को नई उम्र ही दे दी। हाथरस निवासी ईश्वर माहेश्वरी चार बहनों में सबसे छोटे हैं। कुछ माह पहले पता चला कि उसका लीवर पूरी तरह खराब हो चुका है। दवाओं से काम चलाया, पर एक दिन ऐसी गंभीर स्थिति आई कि डॉक्टरों ने दो टूक कहा - अब ट्रांसप्लांट ही आखिरी विकल्प है। घर में हडक़ंप मच गया। परिवार के सभी सदस्यों ने बारी-बारी ब्लड ग्रुप मैच करवाया, लेकिन किसी का भी मैच नहीं हुआ। चिंता गहरा गई। तभी ममता लोईवाल ने हिम्मत जुटाई। घर वाले कह रहे थे-तू तो वैसे ही बहुत कमजोर है, तेरा कैसे होगा? लेकिन ममता ने जिद की। जांच हुई और चमत्कार हो गया-ममता का ब्लड ग्रुप भाई से मैच हो गया। पति अनिल लोईवाल और परिवार की सहमति के बाद ममता ने लीवर डोनेट करने का फैसला ले लिया। फैसला आसान नहीं था। ममता खुद बताती हैं कि वह इतना घबराती थीं कि किसी को इंजेक्शन लगता देख भी नहीं पाती थीं, खून के नाम से हालत खराब हो जाती थी। लेकिन भाई के लिए उन्होंने दर्जनों जांचें, ब्लड टेस्ट, फिटनेस क्लीयरेंस सब हंसते-हंसते करवा लिए। सब कुछ नॉर्मल आया और आखिरकार सफल ट्रांसप्लांट हुआ। आज भाई स्वस्थ है और ममता के इस जज्बे की हर ओर चर्चा है।
भाई की जिंदगी के आगे हार गया डर
जो ममता एमआरआई की मशीन देखकर घबरा जाती थीं, उन्होंने भाई की जिंदगी के लिए दर्जनों जटिल टेस्ट बिना किसी उफ के करवाए। भ्रातृ प्रेम की यह कहानी सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। जहां अंगदान को लेकर आज भी कई भ्रांतियां हैं, वहीं एक बहन के इस आत्मत्याग और साहस ने यह साबित कर दिया कि रिश्तों की डोर अगर मजबूत हो, तो इंसान अपने डर को हरा कर मौत के मुंह से भी अपनों को खींच लाता है।
Updated on:
29 Aug 2026 11:43 am
Published on:
29 Aug 2026 11:41 am
