
नई दिल्ली। मालदीव में नई सरकार के आने के बाद जहां मालदीव में भारत का डंका बजा है। वही दूसरी तरफ चीन को एक जोरदार झटका लगा। नई सरकार ने आते ही चीन के साथ मुफ्त व्यापार समझौते को रद कर दिया। साथ ही चीन के साथ इस समझौता को मालदीव की सबसे बड़ी गलती करार दिया। लेकिन अब मालदीव के इस कदम से चीन बुरी तरह बौखला उठा है और उसने मालदीव सरकार को 3.2 अरब डॉलर यानी 23 हजार करोड़ रुपए के कर्ज की इनवॉइस सौंपी दिया है।
मालदीव पर 3.2 अरब डॉलर का कर्ज
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने यह दावा किया है कि चीन ने मालदीव को 3.2 अरब डॉलर के कर्ज की इनवॉइस सौंपी है। जो कि मालदीव के हर नागरिक पर 8 हजार डॉलर यानी 56 लाख कर्ज के बराबर है। नशीद ने इसे काफी चौंकाने वाला बताया है।हालांकि चीन ने इस आंकड़े को खारिज करते हुए कहा कि यह लगभग 1.5 यानी करीब 10,601 करोड़ रुपए अरब डॉलर के आसपास है।
पूर्व सरकार ने चीन से लिया काफी कर्ज
आपको बता दें कि नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने हाल ही में पूर्ववर्ती अब्दुल्ला यमीन सरकार पर सरकारी खजाने को जमकर लूटने और चीन से भारी कर्ज लेने का आरोप लगाया था। ऐसा माना जाता है कि चीन ने यहां पर सड़क और हाउसिंग निर्माण के नाम पर करोड़ों डॉलर का निवेश किया है। तो वहीं दूसरी तरफ मालदीव के साथ रिश्तों को और बेहतर करने के लिए पीएम मोदी एक बुलावे पर रातोंरात राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंच गए थे। प्रधानमंत्री के तौर पर यह मोदी का पहला मालदीव दौरा था। इससे पहले 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हिंद महासागर के इस द्वीपीय देश की यात्रा की थी।