
नई दिल्ली: कोरोना से जूझते देश को बचाने के लिए मोदी सरकार हर तरह के कदम उठा रही है। मंगलवार को 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद अब सरकार सालों पीछे जा चुकी अर्थव्यवस्था को बचाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए 1.5 लाख करोड़ का पैकेज देने की तैयारी कर रही है।
नाम न बताने की शर्त पर इन अधिकारियों ने बताया कि सरकार, वित्त मंत्रालय और Reserve Bank of India ( rbi ) से लगातार इस बेलआउट पैकेज के मीटिंग्स कर रही है । और आर्थिक पैकेज ( BAILOUT ) की राशि 2.3 लाख करोड़ रुपए तक हो सकती है लेकिन चूंकि मामला अभी भी डिस्कशन लेवल पर है इसीलिए राशि के बारे में कुछ कंफर्म नहीं कहा जा सकता है।
CII कर चुका है 2 लाख करोड़ के पैकेज की मांग-
Confederation of Indian Industry (CII) ने भारत सरकार से 2 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की मांग कर चुका है। फेडरेशन का कहना है कि क्रूड ऑयल पर 10 डॉलर की कटौती से सरकार को इंपोर्ट बिल पर 15 बिलियन डॉलर की बचत होगी। इसीलिए CII के मुताबिक अगर सरकार आधार बेस्ड डायरेक्ट बेनेफिट स्कीम के तहत एक 18 या इससे अधिक उम्र के नागरिक को 5000 और 60 साल से अधिका आयु के लोगों को 10000 रुपए देना चाहेगी तो कम से कम 2 लाख करोड़ रुपए की जरूरत होगी। ऐसे में राहत पैकेज की राशि पर सभी की निगाहें होना लाजमी है।
डायरेक्ट पेमेंट का लिया जा सकता है सहारा-
कहा तो यहां तक जा रहा है कि अमेरिका की तर्ज पर भारत भी अपने देश के नागरिकों को डायरेक्ट पेमेंट सिस्टम से राहत देने का काम कर सकता है। इसके अलावा सरकार वित्तीय वर्ष 2020-21 में लोन अमाउंट को बढ़ा सकती है ।साथ ही सरकार अर्थव्यवस्था में कैश बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक से सरकार प्रतिभूतियों को खरीदने की बात कर रही है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि महंगाई बढ़ने की वजह से आरबीआई ने कई दशकों से सिक्योरिटीज को खरीदने का काम नहीं किया है।
वहीं कोविड-19 की बात करें तो देश में अब तक 562 लोग कोरोना के शिकार हो चुके हैं इसीलिए इस महामारी को काबू में करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को पूरे देश में 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित कर दिया है।