राॅयटर्स की एक रिपोर्ट्स की मानें तो पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था धराशायी होने के कगार पर है। पाकिस्तान में कर्ज के आंकड़ें तेजी से बढ़ रहे हैं, चालू खाता डेफिसिट भी तेजी से बढ़ रहा है, रिजर्व्स खतरनाक निचले स्तर पर है।
नर्इ दिल्ली।पाकिस्तान आम चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद इमरान खान बहुत जल्द ही प्रधानमंत्री पद के लिए शपथ ले सकते हैं। लेकिन पाकिस्तान के नागरिकों को "नया पाकिस्तान" के लिए नारा देने वाले इमरान खान के लिए कर्इ बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। लेकिन इन चुनौतियों में इमरान खान के लिए जो सबसे बड़ी चुनौती होगी वो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की होगी। राॅयटर्स की एक रिपोर्ट्स की मानें तो पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था धराशायी होने के कगार पर है। पाकिस्तान में कर्ज के आंकड़ें तेजी से बढ़ रहे हैं, चालू खाता डेफिसिट भी तेजी से बढ़ रहा है, रिजर्व्स खतरनाक निचले स्तर पर है। वहीं डाॅलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया कमजोर होकर पिछले आठ महीने के सबसे न्यूनतम स्तर पर है। एेसे में जो सबसे बड़ा सवाल है वो ये कि आखिर क्यों पाकिस्तान के अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहा है। आइए जानते हैं इसके कुछ प्रमुख कारण।
रिजर्व करेंसी निचले स्तर पर
द ग्लोब पोस्ट समेत कर्इ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जुलार्इ 2018 तक पाकिस्तान के पास केवल 9.1 अबर डाॅलर ही रिजर्व करेंसी के तौर पर बचा है। इन रिपोर्ट्स के मुताबिक ये रकम बड़ी मुश्किल से पाकिस्तान के लिए दो महीने से अधिक समय के लिए पर्याप्त नहीं होगा। एेसे में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही इमरान खान को इंटरनेशन माॅनेटरी फंड (अार्इएमएफ) का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है। कयासों के मुताबिक असद उमर को पाकिस्तान का अगला वित्त मंत्री चुना जा सकता है। असद उमर ने राॅयटर्स को बताया कि पाकिस्तान सरकार जरूरत पड़ने पर आर्इएमएफ के बदले चीन से मदद ले सकती है। पाकिस्तान ने पहले ही चीन से 60 अरब डाॅलर का कर्ज लिया है जिसका अधिकतर इस्तेमाल चीन-पाकिस्तान इकोनाॅमिक काॅरिडोर के निर्माण में खर्च किया गया है।
टैक्स से इकट्ठा होने वाले राजस्व में भारी कमी
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की आबादी करीब 21 करोड़ है लेकिन इसमें से केवल एक फीसदी लोग है टैक्स भरते हैं। ब्लूमबर्ग ने कहा, "पाकिस्तान एक एेसा देश हैं जहां अधिकतर लोग टैक्स भरने से बचते हैं" हालांकि पूर्व में पाकिस्तानी सरकार ने टैक्स राजस्व बढ़ाने के लिए कर्इ बार प्रयास कर चुकी है लेकिन उसे कार्इ खास सफलता नहीं मिली है।
अमरीका का कहना कि पाकिस्तान अातंकी फंडिंग करता है
इसी साल ही पाकिस्तान को वैश्विक वित्तीय एक्शन टास्क फोर्स में के ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया था। इस लिस्ट में देशों को उनके आतंकी फंडिंग के लिए डाला जाता है। ये फैसला ठीक उस समय लिया गया था जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि पाकिस्तान को मिलीट्री खर्च के लिए दिए जाने वाले फंडिंग में कटौती करेगा। जिससे पाकिस्तान के कम अवधि में कर्ज लेने की क्षमता पर प्रभाव पड़ा है।
निर्यात में बड़ी कटौती वहीं अायात में आर्इ तेजी
वित्त वर्ष 2017-18 में पाकिस्तान के निर्यात वैल्यू केवल 21.9 अरब डाॅलर का रहा था। जो कि पाकिस्तान के 23.1 अरब डाॅलर वार्षिक टार्गेट का 94 फीसदी था। लेकिन इसी अवधिक के दौरान पाकिस्तान ने करीब 57.4 अरब डाॅलर मूल्य का आयात किया। पाकिस्तान प्रमुख तौर पर टेक्सटाइल अौर काॅटन का निर्यात करता है। साल 2017 में पाकिस्तान ने केवल 7.5 अरब डाॅलर के मूल्य के काॅटन आैर टेक्सटाइल का निर्यात किया। वहीं पाकिस्तान आयात होने वाले खनीज र्इंंधन, आैर कंप्यूटर जैसे मशीनरी पर बहुत अधिक निर्भर रहा है। इन दोनों सामानों के आयात पर पाकिस्तान ने साल 2017 में करीब 21 अरब डाॅलर खर्च किया है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक इस वजह से पाकिस्तान पर 35 बिलियन डाॅलर का ट्रेड डेफिसिट हो गया है। जो कि इसी साल अप्रैल माह में 29.4 अरब डाॅलर था।
करेंसी में अार्इ भारी कमजोरी
मौजूदा समय में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था करीब 305 अरब डाॅलर की अांकी गर्इ है। पेमेंट क्राइसिस के संतुलन बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने करेंसी को दिसंबर 2017 के बाद चार डिवैल्यू किया। इसके बाद पाकिस्तनी रुपया 20 फीसदी तक कमजोर हो गया। साल 2013 में भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर कुछ एेसा ही संकट गहराया था। इसके बाद पाकिस्तान ने आर्इएमएफ से 6.7 अरब डाॅलर का कर्ज लिया था।