
नर्इ दिल्ली। बात ज्यादा सालों पुरानी नहीं है। यूपीए सरकार में में लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री हुआ करते थे। जब तक वो रेल मंत्री रहे तब तक रेलवे सरकार के लिए फायदा सौदा रहा, लेकिन उसके बाद रेलवे की हालत खराब ही होती चली गर्इ। अब मौजूदा समय में रेल मंत्री सुरेश प्रभु है। अभी जो कमार्इ कं आंकड़े सामने आए है वो वाकर्इ काफी रोचक हैं। रेलवे को एक ही साल में कैंसल टिकटों से 14 अरब रुपए की कमार्इ हुर्इ है। जो चौंकाने वाली बात है। यानी कर्इ लोगों द्वारा अपनी टिकट को कैंसल कराने पर जो रेलवे को शुल्क मिलता है उससे रेलवे को इतनी बड़ी कमार्इ हुर्इ है।
कैंसल टिकटों से हो रही है रेलवे की कमार्इ
मौजूदा समय में रेलवे की कैंसल टिकट कमार्इ का मोटा जरिया बन गया है। आरटीआर्इ से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017-2018 में टिकट कैंसल किए जाने के बाद रेलवे को मिलने शुल्क से रेलवे की तिजौरी में करीब 13.94 अरब रुपए जुड़ गए हैं। मध्यप्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ के अनुसार उन्हें रेल मंत्रालय के रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सीआरआईएस) के एक अफसर से आरटीआई के तहत दायर अपील पर यह जानकारी मिली है। गौड़ ने बताया कि उन्होंने आरटीआई के तहत नौ अप्रैल को सीआरआईएस को अर्जी भेजकर रेलवे से विभिन्न राजस्व मदों में ब्योरा मांगा था।
वेटिंग लिस्ट में नाम आने पर हुए टिकट कैंसल पर हुर्इ कमार्इ
आरटीआई में मिले जवाब के मुताबिक वर्ष 2017-2018 के दौरान चार्ट बनने के बाद भी वेटिंग लिस्ट में ही रह गए यात्री टिकटों के निरस्त होने पर वसूले गए चार्ज से रेलवे ने 88.55 करोड़ रुपए की कमाई हुर्इ है। वहीं अनारक्षित टिकटिंग प्रणाली के तहत बुक यात्री टिकटों को रद्द कराए जाने से रेलवे ने 17.14 करोड़ रुपए की कमार्इ हुर्इ है। सीआरआईएस से अधूरी सूचना मिलने पर उन्हें आरटीआई के तहत अपील दायर करनी पड़ी। इस अपील का निपटारा होने पर उन्हें रद्द टिकटों पर शुल्क वसूली से रेलवे की मोटी कमाई के बारे में विस्तृत जानकारी मिली।