
नई दिल्ली। वर्ल्ड लीडर्स और ऑर्गनाइजेशंस की ओर से एक बड़ा ऐलान किया है। कोरोना के खिलाफ जंग ( Fight Against Corona ) को लड़ने के लिए जिस दवा को बनाने का प्रयास पूरी दुनिया में किया जा रहा है, उसमें यह देश और संगठन 8 अरब डॉलर यानी 61 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का करेंगे। ताज्जुब की बात तो ये है कि इसमें अमरीका का योगदान नहीं होगा। आपको बता दें कि इस कोरोना वायरस की दवा ( Corona Vaccine ) को बनाने के लिए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ( World Health Organization ) के अलावा दुनियाभर के देशों के डॉक्टर्स काम कर रहे हैं। उसके बाद भी अभी तक दवा सामने नहीं आ पाई है। आइए आपको भी बताजे हैं कि इस योगदान में कौन-कौन से देश शामिल है।
ये देश और संगठन करेंगे सहयोग
वैक्सिन बनाने के लिए 8 अरब से ज्यादा की मदद करने वाले देशों और संगठन में यूरोपियन संघ और गैर-यूरोपीय संघ के देश ब्रिटेन, नॉर्वे और सऊदी अरब शामिल आदि शामिल है। इस मामले में बातचीत करने को लेकर एक वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसमें जापान, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और अन्य दर्जनों देशों के नेताओं ने भी शिरकत की थी। विश्व बैंक, बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और धनी व्यक्ति कई सप्ताहों से कोरोना खिलाफ जंग लडऩे को धनराशि जमा कर रहे हैं। इस मामले में यूरोपियन कमीशन के प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा ने कि कुछ ही घंटों की मीटिंग में कुछ देशों ने कोरोना वायरस की वैक्सीन, उसके डायग्नोस्टिक्स और इलाज को लेकर 8.1 बिलियन डॉलर जमा करने वादा किया है। इससे कोरोना खिलाफ वैश्विक जंग को काफी मदद मिलेगी।
वैक्सिन बनाना बेहद जरूरी
ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन के अनुसार कोरोना वैक्सीन को बनाना काफी जरूरी है। यह साझा प्रयास पूरी दुनिया को एक नई जिंदगी देगा। बोरिस जॉनसन को भी कोरोना वायरस संक्रमण ने जकड़ लिया था। जिंदगी और मौत के बीच जंग के बाद बोरिस अस्पताल के बाहर आए हैं। यूरोपीय यूनियन के अनुसार यूएसए ने इस कार्यक्रम में पार्टिसिपेट नहीं किया। ताज्जुब की बात तो ये है कि दुनिया में सबसे ज्यादा कोरोना वायरस का असर सबसे ज्यादा यूएस में ही है। वैसे अमरीका की ओर से इस मामले अभी तक बयान नहीं आया है कि वो इस कार्यक्रम में भाग क्यों नहीं ले रहा है।