CBSE के नए निर्देशों में यह बात साफ कही गई है कि स्कूल बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को भी समझें। कई बार छात्र मन की बातें किसी से कह नहीं पाते।
CBSE: देश भर के स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए यह एक राहत भरी खबर है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली शिक्षा के ढांचे में ऐसा बदलाव किया है, जो सीधे-सीधे बच्चों की भलाई से जुड़ा है। बोर्ड ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे अब कैंपस में ट्रेंड मेंटल हेल्थ काउंसलर और करियर काउंसलर की नियुक्ति करेंगे। यह फैसला अचानक नहीं आया है। बीते कुछ वर्षों में छात्रों के बीच तनाव, परीक्षा का दबाव और भविष्य को लेकर असमंजस लगातार बढ़ा है। बोर्ड मानता है कि सिर्फ किताबें पढ़ाना काफी नहीं, बच्चों का मानसिक रूप से मजबूत होना भी उतना ही जरूरी है। यह कदम नई शिक्षा नीति 2020 की उसी सोच को आगे बढ़ाता है, जिसमें बच्चे के सर्वांगीण विकास की बात की गई है।
CBSE के नए निर्देशों में यह बात साफ कही गई है कि स्कूल बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को भी समझें। कई बार छात्र मन की बातें किसी से कह नहीं पाते। दबाव बढ़ता जाता है और असर पढ़ाई से लेकर व्यवहार तक दिखने लगता है। ऐसे में स्कूल में मौजूद मेंटल हेल्थ काउंसलर छात्रों के लिए भरोसेमंद सहारा बन सकते हैं।
वे बच्चों को तनाव, घबराहट, अकेलापन या व्यवहार से जुड़ी दिक्कतों से निपटने में मदद करेंगे। इससे छात्र बिना डर के अपनी बात रख सकेंगे।
आज के दौर में विकल्पों की कमी नहीं है। लेकिन यही विकल्प कई बार बच्चों के लिए उलझन बन जाते हैं। 10वीं या 12वीं के बाद क्या करें? यह सवाल लगभग हर छात्र के मन में होता है। करियर काउंसलर की भूमिका यहीं से शुरू होती है। वे छात्रों की रुचि, क्षमता और बदलते जॉब मार्केट को ध्यान में रखते हुए सही दिशा दिखाएंगे। सिर्फ पारंपरिक रास्ते ही नहीं, नए और उभरते करियर विकल्पों पर भी बात होगी।
CBSE ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। काउंसलर के पास जरूरी शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए, जैसे साइकोलॉजी में डिग्री और काउंसलिंग का अनुभव। स्कूलों को काउंसलर से जुड़ी जानकारी बोर्ड के रिकॉर्ड में अपडेट करनी होगी। इसके अलावा, समय-समय पर छात्रों और अभिभावकों के लिए मेंटल हेल्थ से जुड़ी वर्कशॉप आयोजित करने की भी सलाह दी गई है।