
Supreme Court: केंद्र सरकार ने नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के सबूत नहीं हैं। ऐसे में वह दोबारा परीक्षा के समर्थन में नहीं है। केंद्र सरकार ने अपने दावे के समर्थन में आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के डेटा का हवाला दिया है। शीर्ष कोर्ट में पेपर लीक मामले में गुरुवार को सुनवाई होनी है।
केंद्र सकार ने कहा कि आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के विशेषज्ञों की ओर से दी गई रिपोर्ट से साफ है कि परीक्षा में न तो बड़े पैमाने पर कोई गड़बड़ी हुई है और न ही स्थानीय स्तर पर अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के कोई संकेत मिले हैं। आगे कहा कि वह देश भर में नीट की परीक्षा दे चुके छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए बाध्य है। वह यह सुनिश्चित कर रही है कि इस मामले में दोषी उम्मीदवार को किसी प्रकार का कोई लाभ नहीं मिले।
आईआईटी मद्रास (IIT Madras) की रिपोर्ट में कहा गया कि हर सिटी और सेंटर पर बच्चों के नंबरों में बढ़ोत्तरी हुई है। सिलेबस के कम होने के कारण 550 से 720 के बीच अंक बढ़े हैं। किसी भी शहर और सेंटर पर बच्चों के अंक अप्रत्याशित रूप से नहीं बढ़े हैं। अधिकतर छात्रों के पांच फीसदी नंबरों बढ़ोत्तरी हुई है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को बताया कि नीट काउंसलिंग की प्रक्रिया जुलाई के तीसरे हफ्ते में शुरू हो जाएगी। काउंसलिंग चार राउंड चलेगी। किसी भी अभ्यर्थी को अगर पेपर लीक में दोषी पाया जाता है, तो काउंसलिंग या उसके बाद किसी भी स्तर पर रोका जा सकता है। केंद्र सरकार ने कहा कि वह इस मामले में सतर्कता से नजर रख रही है।