एक साल के भीतर तैयार होने वाला यह मॉडल पूरे देश में लागू होगा।
नई दिल्ली। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने 2018 में प्री—स्कूल एजूकेशन के लिए एक नया माडल बनाने की तैयारी की है। इस मॉडल के अगले साल तक तैयार हो जाने की उम्मीद जताई जा रही है। गौरतलब है कि अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन (ईसीई) के संदर्भ में स्थिरता पर राष्ट्रीय परामर्श इसी साल नवंबर में होना है।
पूरे देश में लागू होगा मॉडल
एनसीईआरटी के निदेशक ऋषिकेश सेनापति ने एनसीआरटी के 57 वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान घोषणा करते हुए कहा कि 'परिषद प्री-स्कूल शिक्षा के लिए एक मॉडल बनाने की दिशा में काम कर रही है। यह अगले साल तक तैयार हो जाना चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि यह मॉडल पूरे देश में लागू होगा।' सेनापति ने कहा कि 13 नवंबर को 30 लाख से ज्यादा बच्चों को शामिल करने वाला एक डिस्ट्रिक्ट लेवल नैशनल अचीवमंट सर्वे किया जाएगा।
दिल्ली समेत चार चार आरआईई में प्री स्कूल
एनसीईआरटी भारत सरकार द्वारा स्थापित संस्थान है, जो विद्यालयी शिक्षा से जुड़े मामलों पर केन्द्रीय सरकार एवं प्रान्तीय सरकारों को सलाह देने के उद्देश्य से स्थापित की गयी है। यह परिषद भारत में स्कूली शिक्षा संबंधी सभी नीतियों पर कार्य करती है। एनसीईआरटी रीजनल एजुकेशन इंस्टिट्यूट्स के अलावा आईआईटी-दिल्ली में एक नर्सरी स्कूल भी चलाती है और यह प्री-स्कूल एजुकेशन मॉडल के लिए एक प्रयोगशाला भी है। यह नर्सरी स्कूल 1996 में खोला गया था। वहीं 2008 में शिलांग को छोड़कर, चार आरआईई रीजनल इंस्टीट्यूट आॅफ एजूकेशन में चार प्री स्कूल खोला गया था।
शिक्षा व्यवस्था में निभाती है अहम भूमिका
एनसीईआरटी शिक्षा के समूचे क्षेत्र में शोधकार्य को सहयोग और प्रोत्साहित करने के अलावा उच्च शिक्षा में प्रशिक्षण को सहयोग देने, स्कूलों में शिक्षा पद्धति में लाए गए बदलाव और विकास को लागू करने, राज्य सरकारों और अन्य शैक्षणिक संगठनों को स्कूली शिक्षा संबंधी सलाह देने आदि में अहम भूमिका निभाती है। कुल मिलाकार एनसीईआरटी भारत में शिक्षा से जुड़े लगभग हरेक कार्य में किसी न किसी रूप में शामिल रहती है।