
सपना राजेश वाघमारे।
"जिंदगी तूने मुझे कब्र से कम दी है जमीं,पांव फैलाऊं तो दीवार में सर लगता है।"
बशीर बद्र साहब का शेर, जिंदगी से उस शिकायत को बयां करता है, जो आज के दौर में सैंकड़ों लोगों को है। हालांकि, कुछ लोग इस शिकायत को अपने हुनर से दूर करने का माद्दा भी रखते हैं और महज 25 साल की सपना राजेश वाघमारे उन्हीं में से एक हैं।
सपना महाराष्ट्र के कातकरी आदिवासी समुदाय (Katkari Community) से आती हैं, जहां पढ़ाई नहीं, गुजर-बसर के लिए काम को तवज्जो दी जाती है। इस समुदाय के अधिकांश बच्चे पैरों पर चलना सीखते ही किसी न किसी काम में लग जाते हैं, ताकि घर खर्च में हाथ बंटा सकें। इस अघोषित परंपरा को निभाने का बोझ सपना पर भी था, लेकिन उन्होंने इस बोझ तले अपने सपनों को दबने नहीं दिया। वह पढ़ीं और खूब पढ़ीं, वकालत की डिग्री हासिल की और अब उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड जा रही हैं।
किसी का वकालत करना, उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना सामान्य लग सकता है, लेकिन सपना के मामले में यह बिल्कुल भी सामान्य नहीं। उनकी उपलब्धि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह महज अपने परिवार नहीं बल्कि पूरे समुदाय में 'काला कोट' हासिल करने वालीं पहली हैं। उनसे पहले समाज का एक भी शख्स इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाया है। सपना राजेश वाघमारे ने समाज की उन लड़कियों को आगे बढ़ने की एक राह दिखाई है, जो ये मानकर चलती हैं कि चूल्हा-चौका और बच्चे संभालना ही उनका जीवन है।
महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले के एक छोटे से आदिवासी गांव से ताल्लुक रखने वालीं सपना को आदिवासी विकास विभाग के 'ग्लोबल स्कॉलरशिप प्रोग्राम' के तहत विदेश में पढ़ाई करने का अवसर मिला है। उन्हें इंग्लैंड की प्रतिष्ठित 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीड्स' और 'क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन' में LLM के लिए चुना गया है।
सपना के लिए यहां तक पहुंचाना बिल्कुल भी आसान नहीं था। उनके पैरेंट्स को गन्ने की कटाई से जुड़े काम के लिए अक्सर गांव से दूर जाना पड़ता था। इसलिए उन्होंने सपना को उनकी दादी के यहां छोड़ दिया था। माता-पिता से दूर रहने वाले बच्चों के अक्सर राह भटकने की आशंका रहती है, क्योंकि मां से बड़ा शिक्षक और पिता से बड़ा मार्गदर्शक कोई दूसरा नहीं हो सकता। हालांकि, सपना ने ऐसी हर आशंका को ध्वस्त किया। बेहद कठिन परिस्थितियों में उन्होंने जिला परिषद स्कूल से 5 तक की पढ़ाई की। इसके बाद वनवासी कल्याण आश्रम स्कूल से 10वीं पास की और फिर आगे की पढ़ाई के लिए वह पुणे चली गईं।
पुणे में पढ़ाई के साथ-साथ सपना ने नौकरी भी की, ताकि पढ़ाई का खर्चा निकाल सकें। सपना ने वकालत केवल बेहतर भविष्य के लिए नहीं की, बल्कि इसके पीछे वह दुख-दर्द, अन्याय और अत्याचार है, जो वह अपने आसपास देखती आई हैं। अपने समुदाय की महिलाओं पर हर रोज होने वाले अत्याचारों ने उन्हें कुछ ऐसा करने के लिए प्रेरित किया, जिससे वह उन्हें न्याय की दहलीज तक ला सकें।
सपना के मुताबिक, हमारे समाज की महिलाओं को बहुत ज़्यादा दुर्व्यवहार और अत्याचार का सामना करना पड़ता है। फिर भी, वे इसके बारे में किसी से कुछ नहीं कहतीं, सब कुछ अपने अंदर ही दबाकर रखती हैं। मैंने सोचा कि अगर हमारे समुदाय से कोई वकील बनता है, तो इन महिलाओं के जीवन में सुधार हो सकता है। बस इसी सोच के साथ मैंने वकालत का रास्ता चुना।
कातकरी समुदाय रायगढ़, रत्नागिरी, ठाणे, पालघर सहित राज्य के कई क्षेत्रों में अभावग्रस्त जीवन गुजार रहा है। कई दशकों से यह समुदाय काम की तलाश में यहां से वहां भटकता राहत है। ईंट-भट्ठों से लेकर गन्ने की कटाई तक, इस समुदाय के लोग हर काम करते हैं। इस खानाबदोश जीवनशैली का सबसे गहरा प्रभाव उनके बच्चों की शिक्षा पर पड़ता है। परिणामस्वरूप, अधूरी शिक्षा, बाल विवाह, नशे की लत और महिलाओं के प्रति हिंसा जैसी समस्याएं आज भी इस समुदाय को कसकर जकड़े हुई हैं। इन हालातों में एक लड़की का वकालत करना और उच्च शिक्षा के लिए लंदन जाना, केवल उसकी निजी सफलता नहीं है, बल्कि पूरे समुदाय के लिए गौरव की बात है।
सपना को कातकरी समुदाय का हिस्सा होने पर गर्व है, लेकिन वो यह भी स्वीकार करती हैं कि नशा, बाल विवाह और महिलाओं के साथ अत्याचार जैसे बुराइयों के चलते यह समुदाय लगातार पिछड़ता जा रहा है। इसलिए अब उनका एकमात्र उद्देश्य अपने समुदाय की सूरत बदलना चाहती हैं।
वह कहती हैं - हमारे यहां बच्चे अक्सर अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए। बाल विवाह हमारे यहां आम हैं। लड़की के थोड़ी बहुत पढ़ाई करते ही उसकी शादी कर दी जाती है। मैं अब इसे बदलना चाहती हूं। मेरे लिए, शिक्षा का मतलब केवल डिग्री हासिल करना नहीं था। यह मेरे घर, मेरे समुदाय और मेरी ज़िंदगी को बदलने का एक ज़रिया था। लंदन से पढ़ाई पूरी करके लौटने के बाद अपने समुदाय को आगे बढ़ाना ही मेरा एकमात्र: उद्देश्य होगा।
सपना की कहानी, सैकड़ों लड़कियों को ऐसा 'सपना' देखने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने यह साबित करके दिखाया है कि अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, जुगनू अंधकार को चीरने की शक्ति रखता है, बस जरूरत है उस शक्ति को पहचानने की।
Published on:
02 Jun 2026 06:12 pm
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