
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निर्धारित फीस के अतिरिक्त किसी भी कॉलेज को बैंक गारंटी लेने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सुभारती मेडिकल कालेज मेरठ द्वारा NEET Exam से दाखिले के लिए याची से 31 लाख 89 हजार 400 रुपए की बैंक गारंटी मांगने की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, साथ ही सुभारती को आदेश दिया है कि वह याची को पांच लाख रुपए का मुआवजा दे।
यह आदेश न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अजय भनोट की खंडपीठ ने डॉ. मुक्ताकर सिंह की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता केपी सिंह ने बहस की। कोर्ट ने कहा कि समय बीत चुका है इसलिए याची को पीजी मेडिकल कोर्स में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पांच लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया।
मनमानी रोकी जाए (जल्द जारी होने वाली है NEET 2018 )
कोर्ट ने सरकार से कहा कि भविष्य में ऐसा न हो। गाइड लाइन जारी की जाए। छात्रों की शिकायत पर कार्रवाई के लिए अगले सत्र में एक अधिकारी नियुक्त किया जाए। मेडिकल कौंसिल से परामर्श कर कॉलेजों की मनमानी पर रोक लगाएं और निर्धारित फीस लेने के लिए बाध्य किया जाए।
उत्तर प्रदेश में सरकार की सख्ती और उच्च न्यायलय द्वारा कड़े निर्देश के बाद निजी कॉलेजों के लिए अब धन जुटाना महंगा पड़ सकता हैं। निजी कॉलेज अब तक मनमाने ढंग से अपने विद्यार्थियों से पैसे वसूल रहे थे। सरकार के बनाये नियमों के विरुद्ध चलने वाले कॉलेज पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। प्राइवेट कॉलेजों द्वारा इस अपनाये गए रवैये के खिलाफ कोर्ट और सरकार के पास शिकायतों के मामले बढ़ते जा रहे हैं।