शिक्षा

राजस्थान बोर्ड में बड़ी लापरवाही, छात्रों पर होगा ये असर

Rajasthan Board
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May 04, 2019
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केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों में कला शिक्षा पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है, वहीं दूसरी ओर राज्य में अनिवार्य होने के बावजूद कला शिक्षा न तो सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जा रही है, न निजी स्कूलों में। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है लेकिन इस बार भी शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारी नहीं की है। यहां तक कि न तो किताबें छपवाई हैं, न शिक्षक लगाए हैं।

CBSE से मान्यता प्राप्त स्कूलों में
सीबीएसई ने सत्र 2019-20 में सभी स्कूलों में कक्षा एक से बारहवीं तक के बच्चों को कला शिक्षा अनिवार्य रूप से पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। हर स्कूल को कला शिक्षा के लिए अनिवार्य रूप से प्रति सप्ताह कम से कम 2 कक्षाएं संचालित करनी होंगी ताकि बच्चों को कला संबंधी विषय ड्राइंग, पेंटिंग, शारीरिक शिक्षा आदि की शिक्षा दी जा सके।

राजस्थान में यह स्थिति
शिक्षा नीति के अनुसार कक्षा 6 से 10 तक कला शिक्षा पढ़ाना अनिवार्य है। हर कक्षा में सप्ताह में इसके 2 कालांश जरूरी हैं। शारीरिक शिक्षा के भी सप्ताह में प्रति कक्षा 2 कालांश अनिवार्य हैं। इसके बावजूद राज्य में 1995 से न तो कला शिक्षा के शिक्षक हैं, न यह विषय पढ़ाया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने तो इसकी किताबें छापना ही बंद कर दिया है।

इसलिए जरूरी
कला शिक्षा से सृजनात्मक, बौद्धिक, भावात्मक, शारीरिक विकास होता है। व्यक्तित्व उभरता है। यह शिक्षा बच्चों को अच्छा नागरिक बनने में सहयोग करती है। तनाव तथा हिंसा को दूर करती है।

Updated on:
04 May 2019 01:29 pm
Published on:
04 May 2019 01:29 pm