राजस्थान में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या घट गई है। पिछले एक साल में स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या 63794 कम हुई है। सर्वाधिक कमी नव प्रवेशित बच्चों की संख्या में आई है। वहीं, सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ा है जबकि निजी स्कूलों में न केवल नामांकन घटा है बल्कि कई निजी स्कूल बंद भी हुए हैं।
राजस्थान में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या घट गई है। पिछले एक साल में स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या 63794 कम हुई है। सर्वाधिक कमी नव प्रवेशित बच्चों की संख्या में आई है। वहीं, सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ा है जबकि निजी स्कूलों में न केवल नामांकन घटा है बल्कि कई निजी स्कूल बंद भी हुए हैं। स्कूलों में शिक्षकों की संख्या में वृद्धि हुई है। पहले 6.87 लाख शिक्षक थे जबकि अब 7.15 लाख हो गए हैं। बच्चों के नामांकन, शिक्षकों की संख्या और स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर का यह हाल स्कूल शिक्षा विभाग की डाइस रिपोर्ट में सामने आया है।
विभाग ने साल 2018-19 की रिपोर्ट हाल ही जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2017-18 में प्रदेश के स्कूलों में 1 करोड़ 75 लाख 59 हजार बच्चे थे। यह संख्या 2018-19 में घटकर 1 करोड़ 74 लाख 95 हजार रह गई। निजी स्कूलों में 96 हजार बच्चे कम हुए हैं जबकि सरकारी स्कूलों में 1.16 लाख नामांकन बढ़ा है।
7,688 स्कूल: एकल शिक्षक
शिक्षकों की संख्या बढऩे के बावजूद आज भी 7688 स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे हैं। हालांकि यह आंकड़ा पहले से कम हुआ है। पहले 9008 स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे थे। इनमें 7412 प्राथमिक, 248 उच्च प्राथमिक व 13 माध्यमिक व 15 उच्च माध्यमिक स्कूल भी शामिल हैं। यह स्थिति जनजाति क्षेत्र की ही नहीं बल्कि जयपुर के शहरी क्षेत्र में भी ऐसे स्कूल हैं। एक शिक्षक होने के कारण महीने में 5-7 दिन इनमें अवकाश की स्थिति रहती है।
आरक्षित बच्चे बढ़े
सामान्य वर्ग के बच्चों की संख्या कम हुई है। आरक्षित वर्ग के बच्चों का नामांकन बढ़ा है। एक साल में सामान्य वर्ग का नामांकन 1.14 लाख तक गिरा जबकि आरक्षित वर्ग में एसटी का 6326 और ओबीसी का 64418 तक बढ़ा है। एससी वर्ग का नामांकन 20 हजार कम हुआ है।