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पुडुचेरी के स्कूलों से फ्रेंच हटने पर सियासी बवाल, समझिए क्या है CBSE का थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला जिस पर मचा है विवाद

Puducherry French Language Row: पुडुचेरी के स्कूलों से फ्रेंच भाषा हटाए जाने के विरोध में द्रमुक ने बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। विपक्ष का आरोप है कि सीबीएसई के नए थ्री लैंग्वेज फॉर्मूले से शिक्षकों की नौकरी और पुडुचेरी की फ्रांसीसी संस्कृति पर खतरा मंडरा रहा है। आइए समझते हैं क्या है CBSE का थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला जिस पर मचा है विवाद।

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भारत

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Mohsina Bano

Apr 29, 2026

CBSE three language formula

CBSE Three Language Policy 2026 (Image- gemini)

Puducherry French Language Controversy 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की नेशनलएजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) के तहत कक्षा 6 से थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने की घोषणा ने भारत के मिनी फ्रांस कहे जाने वाले पुडुचेरी में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। पुडुचेरी की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी इस भाषा को सिलेबस से हटाए जाने की आशंका के बीच राजनीतिक दलों ने इसका कड़ा विरोध जताना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि, इस फैसले से पुडुचेरी की ऐतिहासिक फ्रांसीसी विरासत पर संकट गहरा जाएगा।

क्या है सीबीएसई का भाषा नियम?

बोर्ड के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, कक्षा 6 से 8 तक के स्टूडेंट्स के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा। अब तक कई स्कूल दो विदेशी भाषाओं या एक भारतीय और एक विदेशी भाषा का ऑप्शन देते थे, लेकिन अब भारतीय भाषाओं का दबदबा बढ़ेगा।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई स्टूडेंट अंग्रेजी और हिंदी पढ़ रहा है, तो तीसरी भाषा के रूप में उसे संस्कृत, तमिल, कन्नड़ या किसी अन्य भारतीय भाषा को सिलेक्ट करना होगा। पुडुचेरी के ज्यादातर स्कूल इंग्लिश मीडियम हैं, ऐसे में इस नई नीति के लागू होने से फ्रेंच भाषा के लिए सिलेबस में कोई जगह नहीं बचेगी।

पूर्व सीएम ने बताया हिंदी थोपने की साजिश

इस फैसले की तमाम राजनीतिक दलों ने कड़ी आलोचना की है। पूर्व मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि CBSE का एक हफ्ते में इसे लागू करने का निर्देश अलोकतांत्रिक कदम है।

उन्होंने सत्ताधारी एनआर कांग्रेस और बीजेपी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पुडुचेरी में हिंदी थोपने की कोशिश कर रहे हैं। पुडुचेरी के साथ साथ पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में भी इस नीति के खिलाफ आवाजें तेज हो गई हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सीबीएसई के त्रिभाषा फॉर्मूले का कड़ा विरोध करते हुए इसे गैर हिंदी भाषी राज्यों पर जबरन नई भाषा थोपने की कोशिश करार दिया है।

दांव पर है पुडुचेरी की ऐतिहासिक पहचान

यह विवाद सिर्फ एक स्कूली विषय तक सीमित नहीं है। भारत और फ्रांस के बीच 1956 की ऐतिहासिक संधि में, पुडुचेरी में एक आधिकारिक भाषा के रूप में फ्रेंच भाषा को प्रोटेक्शन देने की गारंटी दी गई थी। अगर यह पॉलिसी लागू होती है तो एजुकेशनल सेशन 2026 से 2027 में कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स प्रभावित होंगे।

यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि इस तरह 2030 तक स्कूलों से फ्रेंच भाषा पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

विपक्ष का आरोप है कि, इस फैसले का सबसे बड़ा और सीधा असर उन टीचर्स पर पड़ने वाला है जो सालों से स्कूलों में फ्रेंच भाषा पढ़ा रहे हैं। नई नीति लागू होने पर सिलेबस में विदेशी भाषा के तौर पर फ्रेंच की जगह नहीं बचेगी, जिससे टीचर्स का फ्यूचर अंधकार में डूब जाएगा। केंद्र सरकार से अपील की गई है कि वह देश की भाषाई विविधता का सम्मान करे और छात्रों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।