Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में जम्मू-कश्मीर की बेटी सिमरन बाला ने इतिहास रच दिया। सिमरन कर्तव्य पथ पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) पुरुष जवानों की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। LoC के छोटे से कस्बे में रहने वाली सिमरन के संघर्ष से लेकर कर्तव्य पथ पर इतिहास रचने तक का सफर कैसा रहा।
Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस 2026 की परेड भारत के गौरवशाली सैन्य इतिहास में महिला सशक्तिकरण के नए अध्याय के रूप में हमेशा याद की जाएगी। इस बार दिल्ली के कर्तव्य पथ पर जम्मू-कश्मीर की बेटी सिमरन बाला ने वह कर दिखाया, जिसने हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। सिमरन बाला केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की उस टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला ऑफिसर बन गई हैं, जिसमें 140 से अधिक पुरुष जवान शामिल थे।
26 साल की सिमरन बाला जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा की रहने वाली हैं। उनका जन्म लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के बिल्कुल पास एक छोटे से कस्बे में हुआ था। सिमरन के लिए वर्दी पहनना सिर्फ एक नौकरी नहीं बल्कि विरासत है। वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं जो सेना और सुरक्षा बलों के जरिए देश की सेवा कर रही हैं। बचपन से ही सीमा पर गोलाबारी और तनावपूर्ण माहौल को करीब से देखने वाली सिमरन ने उसी वक्त तय कर लिया था कि, वह सशस्त्र बलों में शामिल होकर देश की सेवा और रक्षा करेंगी।
सिमरन ने अपनी शुरुआती पढ़ाई नौशेरा से करने के बाद जम्मू के गवर्नमेंट वुमेंस कॉलेज से राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सीएपीएफ (CAPF) परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 82वीं रैंक हासिल की। सिमरन उस साल जम्मू-कश्मीर से यह परीक्षा पास करने वाली इकलौती महिला उम्मीदवार थीं।
सीआरपीएफ में शामिल होने के बाद सिमरन को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके बस्तर में तैनात किया गया। वहां उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाकर अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया। अपनी ट्रेनिंग के दौरान भी वह अव्वल रहीं और उन्हें सीआरपीएफ अकादमी में 'सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण अधिकारी' के सम्मान से भी नवाजा गया।
अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि पर सिमरन का कहना है कि, आज के दौर में सबके लिए बराबर अवसर मौजूद हैं, फिर चाहे आप किसी बड़े शहर से हो या छोटे गांव से। सिमरन के पिता विनोद चौधरी और उनकी माता श्रेष्ठा देवी अपनी बेटी की इस कामयाबी पर गर्व कर रहे हैं। सिमरन ने देश की बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि, वह पुरुषों की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली भले ही पहली महिला ऑफिसर बनी हैं, लेकिन वह आखिरी नहीं होंगी। उनका यह सफर साबित करता है कि, अगर इरादे मजबूत हों, तो आपके लिए कुछ भी असंभव नही हो सकता।