नागौर जिले के सभी कॉलेजों के छात्र इस बैक व्यवस्था से पीड़ित हैं। विद्याथियों का कहना है कि आंतरिक मूल्यांकन और थ्योरी परीक्षा में दूसरे विषयों में अच्छे अंक होने के बावजूद उन्हें एक विषय में बैक दी जा रही है।
नई शिक्षा नीति-2020 के तहत कॉलेज शिक्षा में लागू की गई सेमेस्टर प्रणाली विश्वविद्यालय के लिए कमाई का जरिया बन गई है। एक विषय में 'बैक' (अनुत्तीर्ण) दिया जाना और बाद में परीक्षा लेने के बहाने मोटी फीस वसूलना। इस अव्यवस्था का शिकार मेरिटोरियस छात्र भी हो रहे है जबकि अन्य विषयो में उनको अच्छे नम्बर मिल रहे है। बड़ी समस्या पुनर्मूल्यांकन नहीं होना भी है।
नागौर जिले के सभी कॉलेजों के छात्र इस बैक व्यवस्था से पीड़ित हैं। विद्याथियों का कहना है कि आंतरिक मूल्यांकन और थ्योरी परीक्षा में दूसरे विषयों में अच्छे अंक होने के बावजूद उन्हें एक विषय में बैक दी जा रही है। बैक आने पर उन्हें वापस परेशा शुल्क के साथ मानीसेक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।
एबीवीपी, नागौर के जिला संयोजक सुरेन्द्र काला ने कहा कि नई शिक्षा नीति में की गई समेस्टर व्यवस्था में प्रतिभावान विद्यार्थियों के भी किसी न किसी विषय बैक देकर फॉल के नाम पर मोटी वसूली करना गलत है। इस मुद्दे को उच्च स्तर पर पहुंचाएंगे।
पहले साल में एक बार परीक्षा होने से फीस एक बार ही वसूली जाती थी। अब फीस भी दो बार लगती है और वो भी पहले से अधिक। पहले कम नम्बर या बैक आने पर छात्र पुनर्मूल्यांकन करवा लेते थे। अब संबंधित विषय की परीक्षा वापस देनी पड़ेगी और उसकी फीस 1350 रुपए भरनी होगी। पूरे सेमेस्टर की फीस 1700 से 1800 रुपए है, वहीं बैक वाले विषय की फीस 1350 रुपर रखी गई है।
बीआर मिथो कॉलेज, नागौर के प्रिंसिपल डॉ. हरसुखराम छरंग ने बताया कि बैक की समस्या को लेकर छात्रों ने ज्ञापन भी दिया था, जिसे उच्चाधिकारियों को सौंप दिया गया है।