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Success Story: बचपन में ही पिता को खो देने वाली लड़की ने दो बार क्रैक की UPSC परीक्षा, एसडीएम से प्रेरणा लेकर बन गईं IAS

IAS Divya Tanwar: स्कूल के दिनों की एक घटना ने दिव्या के जीवन की दिशा तय कर दी। उनके स्कूल में एक बार एक कार्यक्रम के दौरान एसडीएम मुख्य अतिथि के रूप में आए थे।
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Updated: 12 Sep 2025, 12:32 PM IST
IAS Divya Tanwar
IAS Divya Tanwar(Image-Instagram)

IAS Divya Tanwar: मेहनत और लग्न से किसी काम को किया जाए तो वो जरूर पूरा होता है। ऐसा कोई काम नहीं जिसे दृढ इच्छाशक्ति से पूरा नहीं किया जा सकता है। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है दिव्या तंवर(IAS Divya Tanwar) की, जिन्होंने कठिन हालातों के बावजूद अपने सपनों को साकार किया और देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) में सफलता हासिल की। दिव्या तंवर की जिंदगी की शुरुआत चुनौतियों से भरी थी। जब वह बहुत छोटी थीं, तभी उनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव के बीच दिव्या का बचपन गुजरा, लेकिन उन्होंने हार मानने की बजाय अपने हालात को ताकत बना लिया।

Divya Tanwar IAS: एक कार्यक्रम ने बदली दिशा

स्कूल के दिनों की एक घटना ने दिव्या के जीवन की दिशा तय कर दी। उनके स्कूल में एक बार एक कार्यक्रम के दौरान एसडीएम मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। उस अधिकारी का सम्मान और प्रभाव देखकर दिव्या के मन में कुछ बड़ा करने की इच्छा जगी। उन्होंने उसी दिन ठान लिया कि वह भी एक दिन ऐसा मुकाम हासिल करेंगी, जिस पर उनकी मां को गर्व हो।

Success Story: पहला प्रयास और पहली सफलता

दिव्या ने साल 2021 में पहली बार UPSC परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 438वीं रैंक हासिल की। तब उनकी उम्र मात्र 21 साल थी। इस सफलता के बाद उन्हें आईपीएस सेवा मिली, लेकिन उनका सपना आईएएस बनने का था, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने अगले वर्ष फिर से परीक्षा दी। अपने दूसरे प्रयास में दिव्या ने खुद को साबित कर दिखाया। इस बार उन्हें 105वीं रैंक मिली और वह Indian Administrative Service (IAS) के लिए चयनित हो गईं। यह उनकी मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास का नतीजा था।

IAS Divya Tanwar: बिना कोचिंग, सिर्फ आत्मनिर्भरता

दिव्या बताती हैं कि उन्होंने टॉपर्स के इंटरव्यू देखे, एनसीईआरटी की किताबों का सहारा लिया और इंटरनेट से जरूरी संसाधनों को इकट्ठा कर पढ़ाई की। मुश्किल वक्त में परिवार का सहयोग उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बना। उनकी मां, भाई और बहन ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। दिव्या मानती हैं कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। अगर इंसान सच्चे मन से कोशिश करे, तो उसे एक न एक दिन सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि मुश्किल हालातों में भी सकारात्मक सोच बनाए रखना सबसे जरूरी है।

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12 Sep 2025, 12:32 PM IST
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