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Interview: बचपन से ही कोर्ट-कचहरी से रहा नाता, ये है RJS परीक्षा में 9वीं रैंक हासिल करने वाली राजनंदनी की Success Story

RJS Topper Success Story: राजस्थान ज्यूडिशियल सर्विस का परिणाम जारी हो गया है। जोधपुर की बेटी राजनंदनी जोधा ने RJS 2024 परीक्षा में 182 अंकों के साथ 9वीं रैंक हासिल की है।

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RJS Topper Success Story: राजस्थान ज्यूडिशियल सर्विस का परिणाम जारी हो गया है। इस परीक्षा में कुल 222 कैंडिडेट्स ने सफलता हासिल की है। इनमें से एक जोधपुर (Jodhpur News) की बेटी राजनंदनी जोधा हैं, जिन्होंने RJS 2024 परीक्षा में 182 अंकों के साथ 9वीं रैंक हासिल की है। राजनंदनी अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को देती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हर छात्र को अपने पर भरोसा रखना चाहिए। 

बीटेक के बाद आया LLB करने का ख्याल 

राजनंदनी के घर पर हमेशा से पढ़ाई-लिखाई का माहौल था। लेकिन उन्होंने बहुत देर से जाना कि उनकी मंजिल क्या है। वर्ष 2016 में राजनंदनी ने जोधपुर के JIET कॉलेज से बीटेक किया। डिग्री हासिल करने के बाद उन्हें ज्ञान हुआ कि पिता की तरह उनकी दिलचस्पी भी कोर्ट, कचहरी और काले कोट में है। पिता लक्ष्मण सिंह ने भी बेटी के इस फैसले को सपोर्ट किया।

कहां से हुई पढ़ाई-लिखाई 

राजनंदनी की शुरुआती शिक्षा आदर्श पब्लिक स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने बीटेक किया। फिर वर्ष 2020 में पाली स्थित बांगड़ कॉलेज से LLB की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने LLM की डिग्री भी हासिल की। बता दें, राजनंदनी ने LLM में पूरे राजस्थान में 5वीं रैंक हासिल की थी। 

वर्ष 2021 में दी थी परीक्षा (RJS Topper Rajnandini)

वर्ष 2021 पहली बार राजनंदनी ने RJS की परीक्षा दी थी। लेकिन इस बार वे असफल रहीं। राजनंदनी ने पत्रिका की एजुकेशन जर्नलिस्ट शांभवी शिवानीके साथ बातचीत में बताया, “परीक्षा की कॉपी देखने से मुझे बहुत मदद मिली। मैंने जो भी गलतियां की थी उसे सुधारने के लिए काम किया, जिसका परिणाम आज देखने को मिल रहा है।” वहीं इस बार वर्ष 2024 की परीक्षा में राजनंदनी ने 182 अंकों के साथ 9वीं रैंक हासिल की है। बता दें, राजनंदनी अभी GST विभाग में जूनियर लीगल ऑफिसर हैं।

कॉलेज के समय से ही पिता के साथ जाती थीं कोर्ट (Success Story)

राजनंदनी ने JLO के पद पर होते हुए RJS परीक्षा की तैयारी की। उन्होंने कहा, “मेरी पढ़ाई लगातार जारी रही जोकि मेरे लिए बहुत फायदेमंद रहा। मैं जॉब के साथ भी पढ़ने के लिए वक्त निकाल लेती थी। रोज सुबह उठकर पढ़ती थी। फिर शाम में ऑफिस से आने के बाद लाइब्रेरी जाकर पढ़ाई करती थी। कई बार जब पढ़ाई के दौरान बुरे ख्याल आते थे और निराशा होती थी तो ब्रेक लेकर सुडोकू खेलती थी।” राजनंदनी जॉब लॉ की पढ़ाई कर रही थीं तब वे अपने पिता के साथ कोर्ट भी जाती थीं। यहीं से उन्हें प्रेरणा मिली। 

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