शिक्षा

ये हैं एशिया की 5 सबसे कठिन परीक्षाएं, स्टूडेंट्स भी खाते हैं खौफ

Toughest Exams in Asia: भारत के NEET और UPSC से भी ज्यादा खतरनाक हैं ये परीक्षाएं, परीक्षा के दिन पूरे देश में रुक जाती हैं हवाई उड़ानें। जानिए एशिया की सबसे कठिन एग्जाम्स कौनसी हैं?

2 min read
May 13, 2026
Toughest exams in Asia (Image- ChatGPT)

Toughest Exams in Asia: एशिया के कई देशों में लाखों स्टूडेंट्स के लिए सिर्फ एक परीक्षा उनका पूरा भविष्य कर सकती है। यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना हो, स्कॉलरशिप पानी हो, या फिर बेहतरीन करियर बनाना हो सब कुछ इन्ही नेशनल लेवल के एग्जाम्स पर टिका होता है। इंडोनेशिया से लेकर मलेशिया और चीन तक इन परीक्षाओं को पास करना बहुत मुश्किल माना जाता है। स्टूडेंट्स को कई घंटों तक पढ़ाई करनी पड़ती है और उन पर बहुत ज्यादा तनाव रहता है। हर देश का एजुकेशन सिस्टम भले ही अलग हो लेकिन इन सभी में एक बात समान है कि एक रिजल्ट आपकी जिंदगी की दिशा तय कर देता है।

ये भी पढ़ें

CBSE 12th Result 2026 हो गया जारी, 85 परसेंट स्टूडेंट्स हुए पास, इस लिंक से डाउनलोड करें रिजल्ट

क्यों है बच्चों पर इतना दबाव

ज्यादातर एशियाई देशों में टॉप यूनिवर्सिटी और सरकारी संस्थानों में एडमिशन इन्ही नेशनल एग्जाम्स के अंकों के आधार पर होता है। कुछ लोगों का मानना है कि, इससे सभी बच्चों को आगे बढ़ने का बराबर मौका मिलता है। वहीं कई लोगों का कहना है कि यह सिस्टम बच्चों पर बहुत ज्यादा तनाव डालता है और उन्हें सालों तक सिर्फ परीक्षा की तैयारी करने वाली मशीन बना देता है। इसी भारी तनाव और परेशानी को देखते हुए अब कई देशों ने अपने परीक्षा के तरीकों में कुछ बदलाव भी किए हैं।

एशिया की 5 सबसे कठिन परीक्षाएं

  • गाओकाओ (चीन): यह चीन का यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम है। टॉप यूनिवर्सिटीज की कुछ सीमित सीटों के लिए हर साल 1 करोड़ 30 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स इस परीक्षा में बैठते हैं। इसे दुनिया के सबसे कठिन एग्जाम्स में गिना जाता है।
  • सूनुंग या सीएसएटी (दक्षिण कोरिया): यह दक्षिण कोरिया का कॉलेज एंट्रेंस टेस्ट है। लगभग आठ घंटे तक चलने वाली इस परीक्षा को इसके भारी दबाव और बेहद मुश्किल सवालों के लिए जाना जाता है।
  • उजियान नैशनल (इंडोनेशिया): यह परीक्षा हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने और यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए होती है। हर साल लाखों स्टूडेंट्स यह स्टैंडर्ड टेस्ट देते हैं।
  • बकालोरेट (वियतनाम): यह हाई स्कूल ग्रेजुएशन और यूनिवर्सिटी में एंट्री के लिए जरूरी एग्जाम है। यहां पास होने वाले स्टूडेंट्स की संख्या अच्छी है लेकिन यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए बहुत कड़ी टक्कर होती है।
  • एसटीपीएम (मलेशिया): यह सरकारी यूनिवर्सिटीज में जाने के लिए एक प्री यूनिवर्सिटी क्वालिफिकेशन है। इसे पढ़ाई के लिहाज से बहुत कठिन माना जाता है।

पूरे एशिया पर रहता है इनका असर

भले ही चीन और दक्षिण कोरिया तकनीकी रूप से दक्षिण पूर्व एशिया का हिस्सा नहीं हैं लेकिन वहां के एग्जाम सिस्टम का असर इस पूरे इलाके के एजुकेशन कल्चर पर साफ दिखाई देता है। चीन के गाओकाओ एग्जाम सिस्टम को कई देश अपने एंट्रेंस सिस्टम का मॉडल बनाने के लिए स्टडी करते हैं। वहीं, दक्षिण कोरिया का सूनुंग एग्जाम अपनी सख्त तैयारी के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इस परीक्षा के दिन देश में एक अलग ही माहौल होता है। लिसनिंग टेस्ट के दौरान आवाज न हो इसके लिए उड़ानों में देरी की जाती है दफ्तर देर से खुलते हैं और पूरा देश उस दिन सिर्फ परीक्षा देने वाले बच्चों की सुविधा का ध्यान रखता है।

ये भी पढ़ें

देश के सबसे बड़े सैन्य पद पर हैं काबिज, फिर भी पढ़ाई पूरी कर रहे नए CDS राजा सुब्रमणि
Also Read
View All